बलियाः पेपर लीक मामले में पत्रकारों की गिरफ्तारी को लेकर पिछले एक पखवारा से आंदोलन चल रहा है। मंगलवार को रेमन मैग्सेसे पुरुस्कार प्राप्त संदीप पांडेय भी जुलूस व धरना प्रदर्शन में शामिल हुए। उन्होंने तीनों पत्रकारों की गिरफ्तारी को गलत बताया और कहा कि यह लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ की आवाज को दबाने की कार्रवाई है। पत्रकारों के द्वारा नगर के प्रमुख चौराहों से कलेक्ट्रेट होते हुए जुलूस निकाला गया और जिला प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रकट किया। इस दौरान बैरिया के पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह भी पत्रकारों को समर्थन देने पहुंचे।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जिला प्रशासन का यह प्रयास है कि कोई भी पत्रकार उनकी गलतियों को उजागर नहीं करें, यही कारण है कि सोची-समझी रणनीति के तहत पत्रकारों के ऊपर केस दर्ज कर उन्हें जेल भेजा गया। पत्रकार लगातार आंदोलन भी कर रहे हैं लेकिन डीएम-एसपी पर अब तक कोई कार्यवाही नहीं की गई।वहीं लोगों का कहना है कि पत्रकारों का साथ देने वाले व्यापारी-समाजसेवियों को भी धमकाया जा रहा है। एक समाजसेवी को पोस्टर लगाने पर रेवेन्यू इंस्पेक्टर की ओर से 25 हजार का चालान काटा गया। इससे संबंधित ऑडियो भी वायरल हो रहा है।
इधर पत्रकारों का कहना है कि बलिया से उठी आग पूरे प्रदेश में फैल चुकी है। जब तक जेल में बंद पत्रकारों की रिहाई तथा जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होगी तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा। गौरतलब है कि यूपी बोर्ड परीक्षा के दौरान 30 मार्च को अंग्रेजी इंटर विषय का पेपर लीक हुआ था। उसी दिन केस दर्ज कर पुलिस ने पत्रकार अजीत ओझा, दिग्विजय सिंह मनोज गुप्ता को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इसके बाद पत्रकारों ने आंदोलन शुरु कर दिया। शुरुआती दौर में धरन-प्रदर्शन के बाद मौन जुलूस व बलिया बंद तक हो चुका है। करीब 19 दिनों से प्रदर्शन जारी है।
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