इस वक़्त पूरे देश में 13 प्वाइंट रोस्टर के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है और सरकार के इस फैसले का विरोध हर शहर में हो रहा है। विरोध करने वाले इस सरकार की साजिश बता रहे हैं और कहा जा रहा है कि इसकी वजह से जो गैर बराबरी ख़त्म की कल्पना की गई थी। उसे पूरा नहीं किया जा सकता है। बल्कि इसकी वजह से गैर बराबरी की खाई और लम्बी ही हो जाएगी। इस वक़्त पूरे देश में जैसी राजनीति की जा रही है उसमे मुसलमानों से इशाई और सभी अल्पसंख्कों के साथ सरकार अन्याय कर रही है और उनका प्रतिनिधित्व लगातार कम होता जा रहा है।
ऐसे में जब उनका प्रतिनिधित्व ही सिस्टम के अन्दर ख़त्म हो जाएगा तो उनकी आवाज़ को उठाने वाला कौन होगा। बीते दिनों सरकार ने आर्थिक आधार पर जनरल कैटेगरी के लोगों को आरक्षण देने का प्रस्ताव लाया था। लेकिन अफ़सोस की बात यह रही कि कई बड़ी बाड़ी पार्टियों ने सरकार के इस सविंधान विरोधी कदम का विरोध नहीं किया था। उन्हें डर था कि इस विरोध की वजह से उन्हें मिला वाला सवर्णों का वोट कट जायेगा लेकिन गिने चुने सांसद ही थे जिन्होंने सरकार के इस कदम का विरोध किया। विरोध करने वालों में ऑल इंडिया मज्लिस-ए-इतेहदुल मुसलिमीन के प्रमुख और हैदराबाद के सासंद असदुद्दीन ओवैसी भी शामिल थे।
अब ओवैसी के इस कदम की हर तरफ तारीफ हो रही है और उन्हें सविंधान बचाने वाले सांसद के तौर पर देखा जा रहा है। जेएनयू के छात्रों ने इस कदम के लिए असदुद्दीन ओवैसी की तारीफ की है और उन्हें संविधान रक्षक बताया है। सोशल मीडिया पर इसका वीडियो भी सामने आया है जिसे लोग काफी पसंद कर रहे हैं। एक न्यूज़ पोर्टल वाले ने एक जेएनयू छात्रा से बात चीत की है। इस दौरान छात्रा ने असदुद्दीन ओवैसी की तारीफ की है।
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