बसपा प्रदेश अध्यक्ष कुशवाहा सलेमपुर से हो सकते हैं उम्मीदवार, स्थानीय लोगों में भारी नाराज़गी

उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के गठबंधन के बाद अब सलेमपुर लोकसभा सीट पर गठबंधन की ओर से बसपा उम्मीदवार का चुनाव मैदान में उतरना लगभग तय हो गया है। सूत्रों की मानें तो बसपा इस सीट से प्रदेश अध्यक्ष आरएस कुशवाहा को टिकट दे सकती है।

कुशवाहा को टिकट दिए जाने की संभावना को लेकर स्थानीय लोगों में नाराज़गी देखने को मिल रही है। यहां के लोगों की मांग है कि पार्टी इस सीट से किसी स्थानीय नेता को टिकट दे। बता दें कि बसपा के प्रदेश अध्यक्ष आरएस कुशवाहा लखीमपुर के रहने वाले हैं। विधायक और एमएलसी रह चुके कुशवाहा को पार्टी ने पिछले साल ही उत्तर प्रदेश की कमान सौंपी है। वह इससे पहले पार्टी के टिकट से ही रायबरेली से लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं। जिसमें उन्हें शिकस्त का सामना करना पड़ा था।

इस शिकस्त के बावजूद वह पार्टी का भरोसा जीतने में कामयाब हुए, जिसके नतीजे में उन्हें सूबे की कमान सौंपी गई और अब सलेमपुर से टिकट दिए जाने की संभावना भी है। कुशवाहा भले ही पार्टी का भरोसा जीतने में सफल रहे हों, लेकिन वह सलेमपुर संसदीय क्षेत्र में रहने वाले पार्टी के समर्थकों का दिल जीतने में नाकाम रहे हैं। इस इलाके में बसपा समर्थकों की बस एक ही मांग है कि यहां पार्टी किसी स्थानीय नेता को ही अपना उम्मीदवार बनाए। बसपा समर्थकों की मांग के हिसाब से यहां पार्टी के स्थानीय नेता अशफ़ाक़ हसन की दावेदारी मज़बूत नज़र आती है।

अशफ़ाक हसन बीएसपी के काफी पुराने नेता हैं। वह पार्टी के लिए कई अहम ज़िम्मेदारियां संभाल चुके हैं। 1995 से बीएसपी के लिए काम करने वाले अशफ़ाक़ हसन को इलाके में काफ़ी पसंद भी किया जाता है। मुस्लिम समाज के साथ ही उनकी दलितों में भी अच्छी पैठ है।
जातीय समीकरण के हिसाब से भी अशफ़ाक़ हसन को मैदान में उतारना बसपा के लिए फायदेमंद हो सकता है।

इस संसदीय क्षेत्र में मुसलमानों की आबादी दलित और कुशवाहा के बाद सबसे बड़ी है। और सबसे दिलचस्प बात तो यह है कि यह सीट मुस्लिम प्रत्याशियों को नज़रअंदाज़ करने के लिए कुख्यात है। यहां आज़ादी के बाद से अबतक किसी भी पार्टी ने किसी मुस्लिम प्रत्याशी को चुनावी रण में नहीं उतारा है। ऐसे में बसपा के पास मौका है कि वह मुस्लिम प्रत्याशी को टिकट देकर यहां नया इतिहास रच दे। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि बसपा अपनी पसंद के मुताबिक कुशवाहा को मैदान में उतारती है या फिर अपने समर्थकों की पसंद के उम्मीदवार अशफ़ाक़ हसन को टिकट देकर यहां नया इतिहास रचती है।

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