2 महीने से जलमग्न है चंद्रशेखर यूनिवर्सिटी, नाव चलाकर कार्यालय तक पहुंचता है स्टाफ

पूरे मानसूनी सीजन में बलिया का हाल बेहाल रहा। अब बारिश में कमी है लेकिन समस्या अभी भी बड़ी है। जिले के कई इलाकों में अभी भी पानी भरा हुई है। सबसे ज्यादा चिंताजनक हालत जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय का है, जहां कार्यालय तक पहुंचने के लिए ही नाव का सहारा लेना पड़ रहा है।

हालात यह हैं कि अगस्त माह से समूचे परिसर में चारों तरफ बारिश का पानी भरा हुआ है। मेन गेट से लगभग पांच सौ मीटर की दूरी पर प्रशासनिक कार्यालय तक कर्मचारी नाव चलाकर पहुंचते हैं। चंद्रशेखर विश्वविद्यालय अपनी बदहाली के आंसू रो रहा है। पिछले साल भी कुछ ऐसे ही हालत बने। पूरे विश्वविद्यालय परिसर में जलभराव हो गया। लेकिन 2020 में तत्कालीन डीएम हरिप्रताप शाही की पहल पर हुई कटहल नाला की सफाई से जलजमाव की समस्या से राहत मिलीं थी। लेकिन अब कुलपति आवास भी पानी से घिरा है।

पिछले दो दिनों में हुई बारिश ने चंद्रशेखर विश्वविद्यालय की परेशानी को और बढ़ा दिया है। कुलपति आवास के चारों ओर पानी भरने की सूचना मिलने पर प्रमुख सचिव ने जिलाधिकारी को फोन कर कुलपति के लिए अस्थाई आवास की व्यवस्था कराने और कैंपस से जल निकासी की व्यवस्था करने का निर्देश दिया था, लेकिन अब तक जिला प्रशासन ने कोई कदम नहीं उठाए। आठ अक्टूबर से विश्वविद्यालय की प्रवेश प्रकिया होनी थी लेकिन हालात बिगड़ने के चलते निजी स्कूल में विद्यालय संचालित किया जा रहा है।

जननायक चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय के कुलसचिव एसएल पाल का कहना है कटहल नाला की सफाई हो जाए तो जलजमाव से जल्दी निजात मिल सकती है। कुलपति कल्पलता पांडेय ने जिलाधिकारी समेत शासन को इस समस्या के बारे में पत्र लिखा है। इस समस्या को लेकर राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने 13 मार्च 2021 को द्वितीय दीक्षांत समारोह में कहा था कि किसी अन्य जगह पर प्रशासनिक व शिक्षा व्यवस्था के लिए भवन निर्माण होगा। इसके लिए मंडलायुक्त, डीएम व विश्वविद्यालय प्रशासन बैठ कर जगह के लिए निर्णय लें। उम्मीद जताई कि अगला दीक्षांत समारोह नए भवन में होगा।

लेकिन न तो जनप्रतिनिधियों ने इस पर ध्यान दिया न ही अधिकारियों ने। अब हालात यह हैं कि शिक्षा के जरिए बच्चों का भविष्य सुधारने वाले विश्वविद्यालय का भविष्य ही अंधकार में हैं। दो महीने से पानी में डूबे इस विश्वविद्यालय की सुध लेने प्रशासन कोई कदम नहीं उठा रहा, जिसका खामियाजा बच्चों व स्टाफ को भुगतना पड़ रहा है।

Rashi Srivastav

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