2008 का साल था जब मोहन बिंद बलिया से पठानकोट गए थे। (फोटो साभार: अमर उजाला)
बलिया के रहने वाले मोहन बिंद 13 वर्षों बाद पठानकोट अपने घर लौटे। 49 साल के मोहन बिंद बलिया जिले के बांसडीह रोड थाना क्षेत्र के टघरौली गांव के निवासी हैं। एक दशक से अधिक वक़्त बीत जाने के बाद जब मोहन अपने घर पहुंचे तो परिवार की खुशी का ठिकाना ना रहा।
मोहन बिंद बीते शनिवार की रात टघरौली पहुंचे। घर पहुंचते ही पत्नी सीतिया देवी मोहन बिंद को पकड़कर कर रोने लगी। मोहन बिंद के तीन बेटे और दो बेटियां हैं। पूरा परिवार खुशी के
आंसू से तर था। मोहन बिंद के घर गांव-जवार के लोगों का जमावड़ा लगा था। घर वालों ने बताया कि वो जल्द ही बलिया की जिलाधिकारी से मिलेंगे।
बता दें कि 2008 का साल था जब मोहन बिंद बलिया से पठानकोट गए थे। मोहन पठानकोट रोजगार की तलाश में गए थे। इस दौरान उनकी मुलाकात एक ढाबा के मालिक से हुई। ढाबा वाले ने मोहन बिंद को पंद्रह हजार की तनख्वाह पर एक नौकरी दी। एक महीने बाद जब मोहन बिंद ने ढाबा मालिक से पैसा मांगा तो उसने तनख्वाह नहीं दिया। इसके बदले मोहन को बंधक बना लिया। उसके बाद से ही मोहन बिंद पठानकोट में थे।
घरवालों के अनुसार किसी दिन बांसडीह रोड थाना क्षेत्र के सोनपुर कला निवासी सेना के दो जवान रामजी सिंह और सतेद्र सिंह इत्तेफाक से उसी ढाबे पर पहुंच गए। खाना खाने के दौरान मोहन ने दोनों जवानों से भोजपुरी में “और कुछ लेने के बारे में पूछा”। भाषा से रामजी सिंह और सतेद्र सिंह समझ गए कि मोहन बलिया जिले का है।
रामजी सिंह और सतेद्र सिंह ने मोहन से बातचीत की तब सारी कहानी खुलकर सामने आई। जिसके बाद सेना के जवानों ने मोहन की एक तस्वीर उसके घर पहचान के लिए भेजी। पहचान हो जाने के बाद घर के कुछ लोग पठानकोट पहुंच गए। सेना की मदद से ढाबे पर छापा मारा गया। छापेमारी में मोहन बिंद मिल गए। लेकिन ढाबे का मालिक फरार हो गया।
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