मीडिया को लेकर आवाज़ उठना कोई नई बात नहीं है. एक बार फिर मीडिया की फजीहत हो रही है . आज कल जिस तरह से मीडिया चैनल पर बहस होरही है उससे तो यही कहा जा रहा है कि लगातार मीडिया का स्तर गिरता ही जा रहा है. जहाँ कुछ लोगो पर आरोप है कि वो सत्ता से सवाल नहीं करते . वहीँ दूसरी तरफ एक हिस्सा वह है जो अपने सवालों ने सत्ता में बैठे नेताओं की परेशान करता है।
असल में यूँ देखा जाये तो मीडिया का असल काम यही तो है। बहरहाल, पिछले सालों में अगर किसी की विश्वसनीयत सबसे ज्यादा गिरी है तो वह मीडिया की है। मीडिया वाले भी अब राजनेताओं की तरह एक दूसरे पर कीचड उछालते पाए जा रहे हैं। बहरहाल, अब देश के वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मीडिया को लेकर बड़ा बयान दिया है । आपको बता दें कि वित्त मंत्री अरुण जेटली किताब मन की बात: ए सोशल रिवोल्यूशन ऑन रेडियो के विमोचन पर बोल रहे थे।
इस दौरान उन्होंने कहा है कि उन्होंने मौजूदा दौर में जनता को सबसे शक्तिशाली तरीके से प्रभावित करने वाले सोशल मीडिया को लेकर कहा है कि इसे ज़रिये अब जनता फैसला लेने में सक्षम हो चुकी है। उन्होंने आगे कहा है कि जिस तरह से साल दर साल संचार के तरह तरह में माध्यम आ रहे हैं। उसे देखकर कहा जा सकता है कि आने वाले वक़्त में जनसंचार का प्रारूप में ज़बरदस्त परिवर्तना जायेगा।
इस दौरान उन्होंने कहा है कि 1960 और 1970 के दशक के मुकाबले आज का भारत बिलकुल अलग है। उन्होंने आगे कहा है कि अब जनता को सिर्फ नारों के सहारे बहलाया नहीं जा सकता है। उन्होंने कहा है कि सोशल मीडिया एक ऐसा मंच है जो बिलकुल फ्री है और इसके ज़रिये लोग डिसीज़न मेकिंग बन रहे हैं। आज की मीडिया पर उन्होंने कहा है कि आज कल मुद्दों और घटनाओं की रिपोर्टिग की रिपोर्टिंग पारंपरिक भूमिका के विरुद्ध हो रही है इसके ज़रिये अपना अपना एजेंडा सेट किया जा रहा है।
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