चमकी बुखार को लेकर बलिया में एलर्ट, जानें क्या है इसके लक्षण और बचाव !

बिहार के मुजफ्फरपुर और उसके आसपास के जिलों में एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) अथवा चमकी बुखार भीषण गर्मी और उमस के बीच तेजी से फैल रहा है. ऐसे में बिहार से सटे पूर्वांचल के जिलों में भी इसके फैलने की आशंका के मद्देनजर बलिया जिले के सभी राजकीय व मंडलीय अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्रों को एलर्ट रहने के निर्देश दिए गए हैं.

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ पी के मिश्र ने गुरुवार को बताया कि यह बुखार 15 वर्ष तक के बच्चों को अधिक प्रभावित करता है . मिश्र ने कहा कि किसी बच्चे में कोई भी लक्षण नजर आए तो उसे नजदीक के अस्पताल ले जाएं. बता दें कि इस चमकी बुखार को लेकर बिहार में हाहा कार मचा हुआ है. क्योंकि इस बीमारी से मरने वाले बच्चों की संख्या बढती ही जा रही है.

चमकी बुखार (एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम) के कारण

दिमाग में ज्वर होने पर यह बीमारी बच्चों को अपनी चपेट में लेती है। मस्तिष्क की कोशिकाओं एवं तंत्रिकाओं में सूजन आ जाने पर दिमागी बुखार आता है। मस्तिष्क का ज्वर संक्रामक नहीं होता है लेकिन ज्वर पैदा करने वाला वायरस संक्रामक हो सकता है।
एक्यूट इंसेफलाइटिस की मुख्य वजह वायरस माना जाता है। इनमें से कुछ वायरस के नाम हर्प्स वायरस, इंट्रोवायरस, वेस्ट नाइल, जापानी इंसेफलाइटिस, इस्टर्न इक्विन वायरस, टिक-बोर्न वायरस हैं।

इंसेफलाइटिस बैक्टीरिया, फुंगी, परजीवी, रसायन, टॉक्सिन से भी फैलता है।
भारत में एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम की मुख्य वजह जापानी वायरस को माना जाता है। इसके अलावा निपाह और जिका वायरस भी इंसेफलाइटिस की वजह बन सकते हैं।
चमकी बुखार के लक्षण

अत्यधिक बुखार
उलटी
सिर दर्द
प्रकाश से चिड़चिड़ापन
भ्रम
गर्दन एवं पीठ में दर्द
उबकाई
व्यवहार में परिवर्तन
बोलने एवं सुनने में परेशानी
बुरे सपने
सुस्ती
याददाश्त कमजोर होना
गंभीर हालत में लकवा मार जाना और कोमा की स्थिति
चमकी बुखार से कौन होता है प्रभावित
चमकी बुखार या इंसेफलाइटिस आम तौर पर 15 साल से कम उम्र के बच्चों को अपनी चपेट में लेता है। यह बीमारी उत्तर प्रदेश के पूर्वी क्षेत्र, बिहार, पश्चिम बंगाल, असम और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में बच्चों को अपना निशाना बनाते आई है।

चमकी बुखार का इलाज

चमकी बुखार से पीड़ित बच्चों को बिना देर किए अस्पताल पहुंचाना चाहिए। कोशिश होनी चाहिए कि बच्चे का इलाज आईसीयू में हो।
मस्तिष्क में सूजन को फैलने से रोकने के लिए बच्चे की बराबर निगरानी होती रहनी चाहिए। डॉक्टर को बच्चे का ब्लड प्रेशर, हर्ट रेट, श्वास की जांच करते रहना चाहिए।
कुछ इंसेफलाइटिस का इलाज एंटीवायरल ड्रग्स से किया जा सकता है।
बच्‍चों के शरीर में पानी की कमी न होने दें उन्हें ओआरएस का घोल पिलाते रहें।
तेज बुखार होने पर पूरे शरीर को ताजे पानी से पोछें।
बेहोशी आने पर बच्चों को हवादार जगह पर ले जाएं।

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