केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने 2014 से अब तक विभिन्न मीडिया के माध्यम से विज्ञापन और प्रचार में लगभग ₹ 5,000 करोड़ की भारी राशि खर्च की है, यह एक आरटीआई जवाब से पता चला है। वहीं आम आदमी पार्टी ने पिछले दो वर्षों में दिल्ली पर विज्ञापनों और प्रचार पर कुल 822 करोड़ रुपये खर्च किए है। ये आंकड़े हम इसलिए दे रहे हैं ताकि आप जब जिले का अखबार खोलें तो सदर विधायक और मंत्री आनंद स्वरूप शुक्ल की तरफ से दिया गया विज्ञापन देखें।
स्वास्थ्य विभाग- इस विज्ञापन में सरकार और अपनी उपलब्धि को गिनाते हुए विधायक श्री शुक्ल ने स्वास्थ्य विभाग, कानून व्यवस्था, आवास सहित कई अन्य विभागों का जिक्र किया है। स्वास्थय विभाग की उपलब्धि गिनाते हुए उन्होंने बताया है कि जिला अस्पताल में कोविड की जांच हेतू आर टी पी सी आर लैब की स्थापना और संचालन किया गया। लेकिन पन्ने भर के विज्ञापन में इसका जिक्र नहीं है कि लैब का उद्घाटन कब हुआ। हम बताते हैं। जब जिले में सरकारी आंकडों में भी केसेज़ दहाई में आने लगे, तब 21 मई 2021 को लैब का उद्घाटन किया गया। 21 मई को जिले कुल 85 केसेज़ आए थे। हालांकि यह आंकड़े प्रशासन के हैं लेकिन जब केसेज़ कम हो गये थे तब लैब के उद्घाटन को उपलब्धि में गिनना कैसा है ये तो जिले की जनता ही बता पाएगी।
कानून व्यवस्था- कानून व्यवस्था के कॉलम में पहली ही लाइन है कि नगर विधानसभा को भू-माफियाओं से मुक्त कराया। अब सवाल ये है कि कितने अवैध कब्जों को अथवा अतिक्रमण को कब और कैसे हटाया गया इसका जिक्र कहीं नहीं है। उसी विज्ञापन में महिला और छात्राओं की सुरक्षा को लेकर लिखा गया है कि महिला पुलिस बल की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित कराई। हमने जब जिला प्रशासन से जानना चाहा कि कितनी नई महिला पुलिस की नियुक्तियां हुईं हैं तो वो ये बता सकने में सक्षम नहीं थे। हालांकि उनके कहे अनुसार जिले में कुल 23 थाने हैं जिसमें सिर्फ एक महिला पुलिस थाना है?
अब पर्याप्त सुनिश्चितता का आंकड़ा क्या था इसपर विज्ञापन में कोई बात नहीं है। थाना, कचहरी, ब्लॉक कार्यालय को भ्रष्टाचार मुक्त कर आमजन के लिए सुलभ बनाने की भी बात विज्ञापन में है जिसको लेकर आंकड़े नहीं दिए गए हैं। ऐसे में यह विकल्प भी आमजन के लिए खुला छोड़ दिया गया है कि वो अपने अनुभव के हिसाब से इस पर विचार करें।
सड़क व्यवस्था- सड़क व्यवस्था का जिक्र करते हुए श्री शुक्ल ने अपने विज्ञापन में बताया है कि आज़ादी के बाद अभी तक सड़क से वंचित बेलाडीह में 1600 मीटर लंबी सड़क को 1 करोड़ 31 लाख की लागत से बनवाकर मुख्य धारा से जोड़ा। सोचने वाली बात ये है कि आज़ादी के बाद से अब तक न बन सकी क्या ये आखिरी सड़क थी अथवा इसमें कुछ खास है? इसके अलावा चंद्रशेखर विश्वविद्यालय मार्ग (5.5 किलोमीटर) को 6 करोड़ की लागत से बनाने का जिक्र है। वही चंद्रशेखऱ विश्वविद्यालय जिसके परिसर में अब तक पानी लगा है और प्रशासन की भद्द पिट रही है।
इसके अलावा जिले की सदर विधानसभा या इसके अलावा भी सड़कों का क्या हाल है ये तो उसपर चलने वाले ही बता पाएंगे। फिलहाल विज्ञापन पर लौटते हैं। ठीक इन्हीं तरह के दावों को साथ राशन और आवास का जिक्र हुआ है। भर पेज के इस विज्ञापन में मंत्री आनंद स्वरूप शुक्ल की तस्वीर के हिस्से में भी किसी एक विभाग की बातचीत गिनाई जा सकती थी, हालांकि ऐसा हुआ नहीं। बाकी एक शेर याद आ गया बशीर बद्र का, उसे पढ़ें और बात खत्म, यहां लिबास की कीमत है आदमी की नहीं मुझे गिलास बड़े दे शराब कम कर दे
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