अक्सर लोगो का शिकवा होता है कि उनकी दुआ क़ुबूल नही होती है। लेकिन ये शिकवा गुनाह होता है की दुआ ज़ाया जा रही है। आपको बता दे कि हमारी दुआ ज़ाया नही जाती। आज हम आपको बताएंगे कि वो को सी दुआ है जो ज़ाया नही होती है। हजरत अली रजि अल्लाह ताला अन्हा से एक शख्स ने पूछा प्यारे अली रजि अल्लाह ताला अनहो मेरी दुआ कबूल नहीं होती है। तो हजरत अली रजि अल्लाह ताला अनहो ने फरमाया कि अल्लाह के बंदे जब भी दुआ करो तो ये तीन काम जरूर करो। वो 3 काम यह है कि गायब के लिए दुआ करो अगर आप गायब के लिए दुआ करोगे तो आपकी भी दुआ कुबूल होगी।
हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का इरशाद है कि गायब की दुआ गायब के लिए जरूर कबूल होती है। इसके बाद हजरत अली रजि अल्लाह ताला अनहो ने दूसरी बात इरशाद फरमाया कि जब भी दुआ मांगो तो हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो वाले वसल्लम और उनकी औलाद को हमेशा याद रखो और दुआ के शुरू और आखिर में दुरूद ए शरीफ पढ़ा करो.
जिस दुआ के शुरू और आखरी में दरूद शरीफ पढ़ा जाता है वह दुआ भी कबूल होती है। और तीसरी बात यह है कि जब भी दुआ करो तो अपने नबी को जरूर याद रखा करो हर दुआ में मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के लिए भी दुआ करना चाहिए इससे अल्लाह ताला को प्यार आता है और वह दुआ कबूल करता है।
इसी के साथ आपको बता दे कि अहादीस मुबारका में दुआ की कुबूलियत का वक्त भी बताया गया है। आप सल्लल्लाहो वाले वसल्लम ने फरमाया कि तहज्जूद के वक्त दुआ कबूल होती है। तहज्जूद का वक्त रात का वक्त होता है जिस वक्त लोग नींद में सोए हुए होते हैं और ख्वाब में डूबे होते हैं। कुछ लोग नींद में मस्त होते हैं तो कुछ लोग इस वक्त सोने की तैयारी कर रहे होते हैं आगे देखे वीडियो।
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