बैरिया डेस्क : जयप्रकाश नगर का नाम लेते ही आंखों के सामने एक विकसित गांव का अक्स उभरता है। क्योंकि इस ग्राम पंचायत के विकास के लिए अब तक की सरकारों ने करोड़ों रुपए खर्च किए हैं। बावजूद इसके अभी भी इस गांव के कुछ पुरवे राजघाट के मामले में 19वीं शताब्दी से आगे नहीं बढ़ पाए हैं।
इन्हीं गांव में एक गांव है बाबू का डेरा। यहां के लोगों को 6 महीने तक पानी में तैर कर या पानी में चलकर अपने खेतों में कृषि कार्य के लिए जाने को मजबूर होना पड़ता था। सरकार की तरफ से इस समस्या को लगातार नजरअंदाज किया जाता रहा है। जनप्रतिनिधियों ने भी मौन साध लिया थे।
इनके दर्द को समाजसेवी सूर्यभान सिंह ने अनुभव किया और अपने निजी खर्चे से लगभग 30 मीटर लंबा एवं एक मीटर चौड़ा बांस का पुल इस साल बाबू के डेरा के लोगों के लिए बनवाया है। अब इस कड़ाके की ठंड में लोगों को छाड़न के ठंडे पानी व कीचड़ में चलने को मजबूर नहीं होना पड़ता है। लोग बांस के पुल से आसानी से बीएसटी बंधा होकर छाड़न के उस पार चले जाते हैं।
बांस का पुल बनवाने वाले समाजसेवी सूर्यभान सिंह ने बताया कि पक्का पुल बनवाने में कई अड़चनें हैं। मुख्य अड़चन जमीन का है। बीएसटी बंधे से सटे पूरब तरफ काश्तकारों की जमीन है। काश्तकार अपने जमीन पर पक्का पुल नहीं बनने देंगे।
अगर मुआवजा का प्रावधान होता तो पक्का पुल बन सकता था, लेकिन ऐसा नहीं है। बहरहाल शासन स्तर पर मैं लगातार प्रयत्नशील हूं। बाबू के डेरा के लोगों को अपने खेतों में जाने के लिए पक्का पुल बन जाए। अब देखना है कि कब तक इसमें सफलता मिल पाती है।
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