बलिया में जिला अस्पताल के डाक्टरों के लापरवाही का मामला कोई नया नहीं है । रविवार को भी एक ऐसा ही मामला सामने आया है जहाँ एक बच्ची की मौत ने एक बार फिर यहां की चिकित्सकीय सेवा और स्टाफ की निष्ठा पर सवाल खड़ा कर दिया है।
खबर के मुताबिक बच्ची को सुबह सात बजे ही जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पीड़ित मां का आरोप है कि बार-बार गुहार लगाए जाने के बावजूद न तो नर्स ने बच्ची का हाल जानना मुनासिब समझा और न ही कोई चिकित्सक आए। जब वह इमरजेंसी में बच्ची को लेकर पहुंची तो चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
बता दें की सुखपुरा थाना क्षेत्र के करनई निवासी राजेंद्र गुप्त की छह माह की बच्ची परी एवं पांच वर्षीय पायल की अचानक तबियत खराब हो गई। परिवार के लोग रविवार की सुबह जिला अस्पताल दोनों को लेकर आए।
चिकित्सकों ने दोनों को भर्ती कर लिया। बच्चा वार्ड में परी और पायल को भर्ती किया गया। परी की तबीयत में सुधार नहीं होने पर मां ने नर्स से देखने की गुहार लगाई।
लेकिन नर्स ने ध्यान नहीं दिया। इतना ही नहीं बच्ची की हालत बहुत ज्यादा बिगड़ता देख मां ने किसी चिकित्सक को भी भेजने की बात कही। लेकिन नर्स ने उसकी बात को अनसुना कर दिया। इसी बीच बच्ची की हालत गंभीर होता देख जब उसे इमरजेंसी ले गई तो पता चला कि बच्ची दम तोड़ चुकी है।
यह सुन परिवारजनों के साथ ही अस्पताल परिसर में भी कोहराम मच गया। चिकित्सकों की लापरवाही से इस कदर मासूम की मौत हो जाने से अन्य तीमारदारों में भारी आक्रोश देेखा गया।
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