बलिया में पिछले दिनों आई बाढ़ ने जमकर तबाही मचाई। लोगों के घर ढह गए, खेत-खलियान बिखर गए। फसलें चौपट हो गई, बाढ़ के पानी में गृहस्थी का सामान बह गया लेकिन इतना नुकसान हो जाने के बाद भी राजस्व विभाग उदासीन बना हुआ है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में ठीक से सर्वे नहीं किया जा रहा है। लापरवाही की हद देखिए कि सदर तहसील की ओर से अभी तक सोहांव ब्लॉक के गांवों व फसलों की बर्बादी को लेकर कोई रिपोर्ट तैयार नहीं कि गई है।
बता दें कि एक सप्ताह तक गंगा का जलस्तर बढ़ा रहा। इसके कारण आए जलसैलाब ने फसलों की पूरी तरह चौपट कर दिया। कई किसानों को लाखों का नुकसान हुआ। सौ से अधिक गांव भी पानी से घिर गए। अब बीते कई दिनों से गंगा का जलस्तर लगातार कम हो रहा है लेकिन राजस्व विभाग की ओर से गांवों व फसलों के सर्वे का काम शुरू नहीं किया गया है। सर्वे शुरु नहीं होने से किसानों में भारी आक्रोश है। वहीं कृषि विभाग ने अपना काम शुरु कर दिया है। विभाग ने सोहांव ब्लॉक के 44 गांवों को बाढ़ प्रभावित के तौर पर चिह्नित कर फसलों की क्षति का सर्वे शुरू कर दिया है।
जिला कृषि अधिकारी की मानें तो कर्मियों से मिली रिपोर्ट के आधार पर सदर तहसील के 44 गांव बाढ़ प्रभावित हुए हैं और फसलों को भी काफी क्षति हुई है। बताया कि किसानों को फसल बीमा का लाभ देने के लिए बाढ़ से बर्बाद हुई फसलों का सर्वे किया जाएगा और उसकी रिपोर्ट संबंधित बीमा एजेंसी को भेजी जाएगी।
बताया कि जो किसान फसलों का बीमा कराए हैं उन्हें लाभ देने की कवायद भी की जा रही है और बीमा एजेंसी को भी निर्देश दिया गया है। इस बाबत जिला कृषि अधिकारी विकेश कुमार ने बताया कि विभागीय कर्मियों की रिपोर्ट में सदर तहसील के 44 गांव के किसानों की फसल बाढ़ प्रभावित हुई है। सर्वे कर सही आंकलन किया जाएगा। दूसरी तरफ राजस्व विभाग के उदासीन रवैए ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
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