उत्तर प्रदेश की 10 सीटों पर राज्यसभा के चुनाव हो रहे हैं। आठ सीटों पर बीजेपी और नौवें पर सपा उम्मीदवार की जीत तय है। 10वीं सीट के लिए बीजेपी और बीएसपी उम्मीदवारों के बीच टक्कर है। इस मुकाबले में निर्दलीय विधायक और पूर्व मंत्री रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया की भूमिका अहम है। कहा जा रहा है कि राजा भैया जिधर वोट करेंगे उस तरफ जीत पक्की है क्योंकि उनके साथ एक और विधायक हैं। इस बीच राजा भैया ने अपने पत्ते खोलते हुए कहा है कि वो अखिलेश यादव के साथ हैं, मायावती के साथ नहीं। बता दें कि राजा भैया और मायावती के बीच अदावत पुरानी है। मायावती ने मुख्यमंत्री रहते हुए राजा भैया को जेल भेजवाया था।
साल 2002 में बीजेपी के विधायक पूरन सिंह ने राजा भैया पर जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया था। इसके बाद मायावती ने 2 नवंबर, 2002 की रात करीब तीन बजे राजा भैया को गैंगस्टर एक्ट में गिरफ्तार करवाकर जेल भेजवाया था। इतना ही नहीं उन पर आतंकवाद निरोधी कानून को तहत पोटा भी लगवाया था। कहा जाता है कि तब से राजा भैया और मायावती के बीच रिश्ते फिर कभी सामान्य नहीं हुए।
अब जब करीब 16 साल बाद राजा भैया के समर्थन की दरकार बीएसपी सुप्रीमो मायावती को पड़ी तो राजा भैया ने साफ इनकार कर दिया लेकिन सियासी गोटी बिठाने के मशहूर खिलाड़ी राजा भैया ने यह बात भी साफ कर दी कि वो पहले भी अखिलेश यादव के साथ थे, अभी भी हैं और आगे भी रहेंगे। बता दें कि अखिलेश यादव सरकार में राजा भैया मंत्री रह चुके हैं। राजा भैया कुंडा से लगातार विधायक रहे हैं। जब वो मंत्री थे तब उनपर कुंडा के डीएसपी का मर्डर का आरोप लगा था तब उन्होंने मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था। बाद में कोर्ट से क्लीन चिट मिलने के बाद दोबारा मंत्री बने थे। बता दें कि राजा भैया का परिवार विश्व हिन्दू परिषद और बजरंग दल से भी जुड़ा रहा है। उनके पिता उदय प्रताप सिंह इन दलों में पदाधिकारी रह चुके हैं। इस लिहाज से भी बीजेपी को उम्मीद थी कि राजा भैया उनके पक्ष में वोट करेंगे।
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