रोड पर नाली का वेस्ट, उमरगंज में कैसे आएं घर में गेस्ट…


बलिया. एक तरफ कोरोना वायरस के कारण सबसे ज्यादा जोर सैनेटाइजेशन पर दिया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ शहर से सटे उमरगंज गांव में आलम यह है कि लोग विगत कई महीनों से नारकीय जिदंगी जीने को मजबूर है. शुक्रवार को हुई बरसात के बाद स्थिति और भी ज्यादा दयनीय हो गयी है. घरों से निकलने के बाद लोगों का दर्शन पहले कीचड़ से हो रहा है, फिर उसी गंदा पानी में चलकर लोग अपने कामकाज को जा रहे हैं. नारकीय की स्थिति के कारण घर की महिलाओं तथा बच्चों को सबसे ज्यादा दिक्कत हो रही है, वे एकदम से मानो घरों में कैद हो गए हैं.

 

रेलवे मार्ग के दोहरीकरण के लिए जब से काम शुरू हुआ है तब से शहर से सटे उमरगंज गांव के लोग नरक की जिंदगी जीने लगे हैं. दरअसल रेलवे लाइन के बगल के गड्ढे में ही पहले लोगों के घरों का पानी बहकर जमा होता था, लेकिन इधर बीते एक साल से रेलवे मार्ग के दोहरीकरण के चलते गड्ढे को पाट दिया गया और तभी से समस्या उपजी है. अभी तक जैसे-तैसे चल जा रहा था, लेकिन अब तनिक बारिश में ही स्थिति इतनी दयनीय हो गयी है कि लोग सोचने को मजबूर है. लोगों का कहना है कि अभी ये हाल है आगे अभी पूरी बरसात बाकी है. गौरतलब हो कि गांव की कुल आबादी 6000 है. जबकि यही सड़क है जो गांव को मुख्य सड़क और गांव के दूसरे भाग से जोड़ता है. गांव के रहमतुल्लाह उर्फ लालबाबू का कहना है कि यह स्थिति तो होनी ही थी, जब रेलवे दोहरीकरण का काम शुरू हुआ था, तभी जिम्मेदार लोगों को पानी निकासी का प्रबंध कर देना चाहिए था, लेकिन अब स्थिति इतनी खराब हो गयी है कि सामने बरसात होने के कारण कुछ हो भी नहीं सकता है. गांव के पिहू भाई का कहना है कि हम गांव में प्रतिनिधि इसलिए चुनते हैं कि पक्की नाली हो, पानी निकासी की समुचित व्यवस्था हो, लेकिन उमरगंज गांव की स्थिति बहुत ही दयनीय है अब हम तो वोट देकर पछता रहे हैं. गांव के शेरू, रघुवर, चतुर, पप्पू, शिवनाथ आदि लोगों ने इस ओर जिलाधिकारी का ध्यान आकृष्ट कराते हुए तत्काल रूप से इससे निजात दिलाने की मांग की है.

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