बलिया के जिला अस्पताल में अव्यवस्थाओं का आलम देखा जा रहा है। अस्पताल में पिछले एक सप्ताह से डिजिटल एक्स-रे और महिला अस्पताल में खून की जांच बंद है। ऐसे में जिला अस्पताल में आने वाले मरीज परेशान हो रहे हैं और बिना जांच के ही वापस घर लौट रहे हैं। कुछ गम्भीर मरीज अपनी जांच करवाने के लिए प्राइवेट क्लीनिकों का सहारा ले रहे हैं और मंहगी दरों पर जांच करवाने को मजबूर हो रहे हैं। इधर अस्पताल के टीबी क्लीनिक व एक्सरे विभाग में मैनुअल एक्सरे मशीन होने के बावजूद इमरजेंसी मरीजों की भी जांच नहीं हो रही है।
बता दें कि सोमवार को 1721 नये मरीजों ने ओपीडी की पर्ची कटवाई, वहीं 427 मरीज पुराने रहे। हड्डी रोग विशेषज्ञों की तीन ओपीडी में 279 मरीज पहुंचे, इसमें 125 मरीजों को चिकित्सकों ने एक्स-रे जांच लिखी। पेट दर्द व सीने में जकड़न की समस्या वाले 82 मरीजों को एक्स-रे जांच कराने को चिकित्सकों ने सलाह दी, लेकिन अस्पताल में जांच की सुविधा न होने से मरीज काफी परेशान दिखे। कुछ मरीजों की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के चलते वे जांच कराए बिना ही मायूस होकर घर लौट गए। वहीं कुछ मरीजों ने निजी जांच केंद्रों पर जांच कराई।
बता दें कि ग्रामीण क्षेत्रों के सीएचसी पीएचसी पर भी डिजिटल एक्स-रे जांच की सुविधा नहीं हैं, ऐसे में अस्पताल में रोज 100 से ऊपर जांच होती थी। 30-40 जांच की क्षमता होने के बावजूद मरीजों की भीड़ होने के कारण कर्मचारी 100-120 जांचें रोज करते थे। इधर अस्पताल की इमरजेंसी वार्ड के सामने बेतरतीब तरीके से वाहन खड़े होने से अन्य मरीजों को काफी परेशानी होती है। अस्पताल की सुरक्षा को लेकर निनी सुरक्षा गार्ड व 12 होमगार्ड तैनात रहते हैं, लेकिन फिर भी वाहनों को ठीक तरीके से खड़े करवाने पर ध्यान नहीं दिया जाता।
सोमवार को अस्पताल परिसर में मरीजों की भारी भीड़ रही। गंभीर मरीजों को इमरजेंसी कक्ष में आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ा। एंबुलेंस या निजी वाहन से मरीज आने पर वाहन घुमाने में चालक को परेशानी उठानी पड़ी। अस्पताल परिसर में तैनात निजी सुरक्षा गार्ड व होमगार्ड उयूटी से नदरद रहे। पर्ची काउंटर सहित अन्य जगह भीड़ होने से मरीजो के बीच विवाद होता रहा। इस मामले को लेकर सीएमएस डॉ एके यादव ने कहा की ड्यूटी में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी, सीसी कैमरे से लगातार निगरानी हो रही है। सुरक्षा गार्डों के खिलाफ कंपनी व अधिकारी को पत्र लिखा जाएगा।
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