बलिया। युवा तुर्क के नाम से मशहूर रहे दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर को भारत रत्न दिए जाने की मांग ने जोर पकड़ लिया है। सामाजिक चेतना समिति मनियर के युवाओं ने राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के प्रतिनिधि को सौंपा। जिसमें मांग की गई है कि भारत यशस्वी, ईमानदार एवं कर्मठ पूर्व पीएम को भारत रत्न दिया जाए।
जिससे आने वाली पीढ़ियां अपने युवातुर्क से चिरकाल प्रेरणा लेती रहें। ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि यदि देश के राजनीतिक परिदृश्य पर नजर दौड़ाई जाए तो आजादी के बाद देश की सत्ता की बागडोर मुख्यत: कांग्रेस के हाथों में रही।
समाजवादी आंदोलन के उपज के रुप में बतौर प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने मुश्किल राजनीतिक परिस्थितियों में 10 नवंबर 1990 को देश की बागडोर संभाली।
नाजुक हालातों में लगभग छह माह तक देश के प्रधानमंत्री का पद निर्वहन किया। उनकी प्रसांगिकता इस बात से भी परिलक्षित होती है कि उन्हें दलीय सीमाओं और पक्ष-विपक्ष से परे हटकर राष्ट्र नेता के रुप में जाना जाता है। चंद्रशेखर किसी दल के नहीं बल्कि पूरे राष्ट्र के धरोहर हैं। ऐसे में उन्हें भारत रत्न से नवाजा जाना चाहिए। ज
जानकरी के लिए बता दें की 8 जुलाई 2007 को दिल्ली के अपोलो अस्पताल में उनका देहांत हो गया था। चंद्रशेखर से जुड़े कई ऐसे किस्से हैं, जिन्हें आज भी सुनाया जाता है। कहा जाता है कि वो पहले ऐसे प्रधानमंत्री थे, जिन्होंने राज्य मंत्री या केंद्र में मंत्री बने बिना ही सीधे प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी।
हमारी आज की पीढ़ी के बहुत कम सदस्य जानते होंगे कि चंद्रशेखर समाजवाद के भारत विख्यात मनीषी आचार्य नरेंद्रदेव के शिष्य थे और इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अपने छात्र जीवन में ही समाजवादी आंदोलन से जुड़ गए थे।
राजनीतिक में उनकी पारी सोशलिस्ट पार्टी से शुरू हुई और संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी व प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के रास्ते कांग्रेस, जनता पार्टी, जनता दल, समाजवादी जनता दल और समाजवादी जनता पार्टी तक पहुंचकर खत्म हुई।
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