सितंबर महीने में एक किशोर का शव चितबड़ागांव रेल पटरी पर मिला था। पुलिस ने इस शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया था। किशोर के पिता चितबड़ागांव थाना क्षेत्र के नगवां गांव के निवासी मंगला यादव ने सीजेएम कोर्ट में इस मामले में वाद दाखिल किया था। मंगला यादव ने धारा 156(3) के तहत वाद दाखिल किया था। गुरूवार को सीजेएम कोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुनाते हुए पुलिस को केस दर्ज करने का आदेश दिया है।
मंगला यादव ने कोर्ट को बताया है कि मेरे 16 वर्षीय बेटे मोहित यादव का शव 10 सितंबर को रेल पटरी पर पड़ा हुआ मिला था। पुलिस को इस बात की जानकारी मिली तब पुलिस रेल पटरी के पास पहुंची। पुलिस द्वारा सूचना मिलने के बाद हम लोग वहां पहुचे। शव का पोस्टमार्टम होने के बाद हमने शव का अंतिम संस्कार कर दिया।
मंगला यादव के अनुसार पुलिस ने शव मिलने के दस दिनों बाद यानी 20 सितंबर को उन्हें थाने पर बुलाया। पुलिस ने मंगला यादव को मोहित का चप्पल और ईयरफोन दिया। साथ ही बताया कि चितबड़ागांव कस्बा के रहने वाली एक लड़की के घर से यह सामान बरामद हुआ है। मंगला यादव का कहना है कि मोहित पढ़ाई करता था। पढ़ाई के साथ-साथ मोहित कैटरिंग का काम भी करता था। कैटरिंग वाले के नजदीक ही उस लड़की का घर है जहां से मोहित का चप्पल और ईयरफोन बरामद हुआ है।
मोहित के पिता ने आरोप लगाया है कि उनके बेटे की हत्या की गई। हत्या को दूसरा रूप देने की कोशिश हुई है। मंगला यादव के इसी आवेदन पर सीजेएम कोर्ट ने आज पुलिस को इस मामले में मुकदमा दर्ज कर जांच करने का आदेश दिया है। देखने होगा कि आने वाले दिनों में पुलिस की जांच क्या नए खुलासे करती है? सवाल है कि जब पुलिस को मोहित का चप्पल और ईयरफोन किसी के घर से मिला था तब पुलिस ने इस पर क्या कदम उठाया?
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