बलिया का जिला अस्पताल, यहां हर रोज सैंकड़ों ग्रामीण अपना इलाज कराने पहुंचते हैं। अस्पताल पर दबाब कम करने के लिए सरकार के द्वारा जगह जगह सीएचसी, पीएसची स्थापित किए गए। लेकिन अब यह स्वास्थ्य केंद्र रेफरल अस्पताल बन चुके हैं।
जहां पहुंचने वाले मरीजों का इलाज करने की बजाए उन्हें सीधे जिला अस्पताल रेफर किया जा रहा है। अधिकाश अस्पतालों में चिकित्सक और कर्मचारी नहीं रहते। जिसके कारण लोगों को समय पर इलाज नहीं मिलता। कभी-कभार डॉक्टर मिलते भी हैं, तो वो भी मरीज को देखने की बजाय जिला अस्पताल भेज देते हैं।
जिले में करीब 17 सामुदायिक और 66 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। नए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की संख्या 100 से अधिक है। इस सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टर्स की तैनाती है। लाखों की दवाइयों की आपूर्ति यहां की जाती है। इन स्वास्थ्य केंद्रों को स्थापित करने के पीछे सरकार का उद्देश्य था कि रोगियों और घायलों का जल्द ही इलाज संभव हो सके। ताकि देहात क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी का सामना न करना पड़े।
लेकिन सरकार के प्रयास निरर्थक साबित हो रहे हैं। कई बार घायलों का नजदीक के सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में इलाज नहीं हो पाने और कई किलोमीटर दूर सदर अस्पताल पहुंचाने में समय का जाया होने से मौत भी हो जाती है। जिला मुख्यालय से 45 किमी दूर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सीयर हो और 35 किमी दूर बिहार की सीमा पर स्थित सीएचसी सोनबरसा पर तैनात चिकित्सक मरीजों को जिला अस्पताल ही भेजते हैं। सीएचसी रसड़ा और सिकन्दरपुर की भी यही स्थिति है। इस संबंध में CMO डॉ. नीरज पांडेय का कहना है कि गंभीर रोगियों को ही रेफर करने का प्रावधान है। अगर शिकायत मिलती है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
बलिया।जमुना राम मेमोरियल स्कूल में कक्षा 12वीं के छात्र-छात्राओं के लिए भव्य विदाई समारोह का…
फेफना (बलिया)। क्षेत्रीय संघर्ष समिति फेफना के नेतृत्व में शुक्रवार को क्षेत्रवासियों ने रेलवे बोर्ड…
26 जनवरी 2026 को जमुना राम मेमोरियल स्कूल के प्रांगण में 76वां गणतंत्र दिवस समारोह…
बलिया। ध्रुवजी सिंह स्मृति सेवा संस्थान, पूर-बलिया के सचिव भानु प्रकाश सिंह ‘बबलू’ ने विश्वविद्यालय…
बलिया जिले की फेफना विधानसभा क्षेत्र के तीखा गांव में टोंस नदी तट पर स्थित…