बलिया में जन्म से ही टेढ़े-मेढ़े हाथ-पैर वाले बच्चों का इलाज अब संभव हो सकेगा। जिले में जन्मजात हाथ-पैर से विकलांग बच्चों का उपचार राष्ट्रीय बाल विकास कार्यक्रम आरबीएसके की सहायता से होगी। जिला अस्पताल में हर सप्ताह मंगलवार को मीरेकल फीट इंडिया एक क्लब फुट क्लीनिक खोलेगी। जहां दो साल की उम्र तक के ऐसे बच्चों का उपचार किया जाएगा। पोसेटी तकनीक के द्वारा ऐसे बच्चों को ठीक किया जाएगा। बलिया जिला अस्पताल के आर्थो सर्जन डॉ. संतोष चौधरी ने कहा कि “बलिया जिला अस्पताल में यह इलाज शुरू किया जा चुका है।
आरबीएसके के नोडल अधिकारी डॉ. हरिनंदन प्रसाद ने बताया कि क्लब फुट के कारण जन्म से ही कई बच्चे अपने पैर पर खड़े नहीं हो पाते हैं। ऐसे बच्चों के पैर का इलाज पोसेटी तकनीकी के जरिए किया जाता है। पोसेटी तकनीक में लगभग पांच से आठ हफ्ते का समय लगता है। इसके बाद एक ऑपरेशन किया जाता है। ऑपरेशन से बच्चों के पैर को सामान्य स्थिति में लाने में मदद मिलती है।
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