बलिया। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में लगभग एक पखवारा से खून नहीं है। लेकिन इसको लेकर न तो ब्लड बैंक में तैनात संबंधित अधिकारी ने दिलचस्पी दिखाई और न ही सीएमएस डा. बीपी सिंह ने। नतीजन खून के अभाव में बीते तीन दिन में दो-दो मरीजों की जान चली गई।
ज्ञात हो कि कोरोना महामारी के बीच लॉकडाउन के कारण लगभग डेढ़ महीने से जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में कोई ब्लड डोनेशन कैंप का आयोजन नहीं हुआ। नतीजन जिला अस्पताल का ब्लड बैंक लगभग एक पखवाड़े से खाली चल रहा है। जिससे आए दिन मरीजों को खून के अभाव में या तो अन्यत्र जहग रेफर होना पड़ रहा है या फिर खून के अभाव में अन्यत्र रेफर होना पड़ रहा है।
केस:1
बहेरी निवासी मेराजुद्दीन खां की चचेरी बहन मुमताज बानो जिसकी शादी मऊ जनपद में हुई थी, नौ महीना नौ दिन की गर्भवती थी, इसबीच चिकित्सकीय जांच में पता चला कि गर्भवती महिला के शरीर में खून नहीं है। तत्काल बी पाजिॅटिव ग्रुप के दो यूनिट खून चाहिए, लेकिन अफसोस जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में एक यूनिट भी खून नहीं था, लिहाजा मुमताज बानो अपनी जान से हाथ गंवाना पड़ा। सबसे बड़ी हैरत की बात यह है कि जिला अस्पताल के सीएमएस डा. बीपी सिंह के नंबर ९४५११५७८२२ पर जब कॉल किया गया तो उन्होंने फोन रिसीव करना भी मुनासिब नहीं समझा। मजबूरन मेराज मऊ के लिए अपनी बहन को रेफर करवा लिया, लेकिन अफसोस उसकी बहन बीच रास्ते में ही दम तोड़ दिया।
केस:2
ताजपुर डेहमा निवासी करिश्मा वर्मा की पुत्री फुलमतिया देवी को बच्चा होना था, एक यूनिट ए पॉजिटिव खून की जरूरत थी। करिश्मा जब अपनी बेटी को लेकर जिला अस्पताल आई तब पता चला कि जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में खून नहीं है। आनन-फानन में वह किसी ओर जगह से खून का बंदोबस्त करता तब तक उसकी जान चली गई।
रिपोर्ट- तिलक कुमार
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