बलिया। सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त ने गोंड समाज का जनजाति प्रमाण बनने को लेकर साफ कहा कि अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र जारी करने में अगर किसी ने सुविधा शुल्क मांगा तो जेल जाने को तैयार रहे। क्योंकि सरकार भ्रष्टाचार के मामले में जीरो टॉलरेंस नीति पर काम कर रही है।
बातें वीरेंद्र सिंह मस्त शुक्रवार को बैरिया तहसील परिसर में गोंड समाज के अभिनंदन समारोह में शामिल हुए। जहां उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों ने बलिया, गाजीपुर, आजमगढ़, मऊ, देवरिया, वाराणसी आदि जनपदों के गोंड जाति के लोगों को भड़भूजा घोषित कर दिया था। वास्तव में यह लोग गोंड जाति के हैं। इनका नुकसान कांग्रेस, बसपा व सपा की सरकारों ने किया था।
जिसको लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बात की। संसद में भी सत्र के दौरान मुद्दा उठाया। तब जाकर स्थिति स्पष्ट हुई। अब पूर्वांचल के गोंड भड़भुजा नहीं रहे। गोंड हो गए हैं। इन्हें सुविधा पूर्वक प्रमाण पत्र संबंधित विभाग जारी करे।आनाकानी करने और रिश्वत मांगने पर जेल जाना पड़ सकता है। उन्होंने केंद्र और प्रदेश सरकार की उपलब्धियों को भी गिनाया।
वहीं उप जिलाधिकारी बैरिया आत्रेय मिश्र ने गोंड समाज के कल्याण और सरकारी योजनाओं पर प्रकाश डाला और इनके विकास के लिए सरकार द्वारा जारी कार्यक्रमों और बजट के विषय में विस्तार से बताया। अनुसूचित जनजाति भाजपा के प्रदेश मंत्री ताड़केश्वर गोड़ ने बैरिया तहसील प्रशासन पर गोंड जाति को प्रमाण पत्र देने में आनाकानी करने व सुविधा शुल्क मांगने का आरोप लगाया।
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