सांकेतिक तस्वीर
बलिया डेस्क : जिला महिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड (सिक न्यू बार्न केयर यूनिट) उनके लिए वरदान है, जिनके नवजात बच्चे पीलिया, कम वजन और संक्रमण सहित अन्य रोगों की चपेट में आ रहे हैं। उन्हें वार्ड में भर्ती होने के बाद दवा से लेकर हर व्यवस्था नि:शुल्क मिलती है। लेकिन प्रशासनिक व जनप्रतिनिधियों की उदासीनता कहें या सिस्टम की खराबी, बेडों की संख्या नहीं बढऩे से इन दिनों मुश्किल बढ़ गई है।
चिकित्सक को मजबूरत एक बेड पर तीन-तीन बच्चों का इलाज कराना पड़ रहा है। बेहतर उपचार की आस में अब तीमारदारों को दूसरे अस्पतालों की राह देखनी पड़ रही है। ऐसे में आए दिन विवाद की स्थिति उत्पन्न हो रही है।
बता दें कि महिला अस्पताल में प्रतिदिन 20 से 24 प्रसव न होते हैं, आधा दर्जन बच्चों को विभिन्न रोगों के चलते एसएनसीयू वार्ड में भर्ती किया जाता है। वार्ड में सिर्फ 14 बेड हैं, जिसमें तीन खराब हैं। ऐसे में इस समय सभी बेड फुल हैं। इससे एक बेड पर तीन बच्चों का इलाज चल रहा है।
वहीँ इस पुर मामले पर जिला महिला अस्पताल की सीएमएस, डा. सुमिता सिन्हा का कहना है कि एसएनसीयू वार्ड में बेड कम हैं, इसलिए नवजात बच्चों को मजबूरन रेफर करना पड़ता है। इसके लिए कई पत्र लिखे गए हैं, कार्रवाई का इंतजार है।
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