बलिया : गोंड जा’ति को लेकर छिड़ी बहस तूल पकड़ती जा रही है। गोंड जाति एस’टी या ओबी’सी वर्ग के अंतर्गत आती है, इसको लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार और अन्य विप’क्षियों से जवाब तलब किया है। न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने उमाशंकर राम की याचिका पर सुनवाई करते हुए मामले में चार हफ़्ते के अंदर जवाब देने का आदेश दिया है। दरअसल, उमाशंकर राम ने अपनी याचिका में मंडलीय जा’ति समीक्षा समिति के 29 जून 2020 के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें गोंड को अन्य पिछ’ड़ा वर्ग का बताया गया है।
उमाशंकर ने अपनी याचिका में गोंड को अनुसूचित जनजाति का बताया है। बता दें कि याची के खिलाफ बलिया के सुभाष चंद्र तिवारी ने जिला स्तरीय जाति समीक्षा समिति में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता ने इस संबंध में एक दीवानी मुक़दमा भी दाखिल किया, जो अभी विचाराधीन है। ज़िला स्तरीय समिति ने याची के जाति प्रमाणपत्र को सही करार देते हुए गोंड को अनुसूचित जनजाति का बताया है।
वहीं सुभाष चंद्र तिवारी के वकील निर्भय भारती गिरि ने दावा किया था कि बलिया में अनुसूचित जन’जा’ति नहीं है। उनका कहना था कि वास्तव में यह गोंड यानी भुज’वां जा’ति के हैं, जो ओबीसी में आती है। ज़िला स्तरीय समिति के आदेश को मंडलीय समिति में चुनौती दी गई। जिसके बाद मंडलीय समिति ने जिला समिति के निर्णय को गलत करार देते हुए रद्द कर दिया और कहा कि याची गोंड यानी भुजवां जा’ति का है, जो ओबीसी में दर्ज है।
कोर्ट ने मामले को विचारणीय मानते हुए प्रदेश सरकार और सुभाष चंद्र तिवारी के वकील को चार हफ़्ते में जवाब दाख़िल करने का निर्देश दिया है। ग़ौरतलब है कि इससे पहले सडीएम रहे शयाम बाबू की नियुक्ति उनकी गोंड जाति की वजह से निरस्त कर दी गई थी। उन्होंने नियुक्ति के लिए लगाए गए प्रमाण पत्र में ख़ुद को अनुसूचित जनजाति का बताया था। जबकि बैरिया के तहसीलदार ने अपनी आख्या में श्याम बाबू को एसटी का नहीं माना।
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