यूपी विधानसभा चुनाव का परिणाम आ चुका है। भाजपा ने बहुमत हासिल किया है। हालांकि इस चुनाव में भाजपा को पिछले चुनाव की तुलना में सीटों का घाटा ज़रूर हुआ है। बलिया की बात करें तो यहां की 4 सीटों पर साइकिल दौड़ी, 2 पर कमल खिला और एक सीट पर बसपा का दबदबा रहा।
वहीं इस बार के चुनाव में मतदाताओं ने नोटा का भी खूब इस्तेमाल किया। इस बार करीब 9 हजार 380 मतदाताओं ने नोटा के विकल्प को चुना है। कई जगह तो नोटा को उम्मीदवारों से भी अधिक वोट मिला है। ज़िले की सातों सीटों पर 50 उम्मीदवार ऐसे हैं, जिनको वहां पड़े नोटा के वोट से भी कम मत मिले हैं। सबसे ज्यादा नोटा का बटन बांसडीह के लोगों ने दबाया। यहां 2004 लोगों ने ‘इनमें से कोई नहीं’ का विकल्प चुना है। जबकि सबसे कम बलिया नगर में 1,054 ने मतदान के लिए नोटा के विकल्प को चुना है।
पिछले कुछ सालों में नोटा का प्रयोग करने वाले वोटरों की संख्या में भी खासा बढ़ोतरी हो रही है। आंकड़ों पर नज़र डालें तो बलिया नगर में 1054, बांसडीह में 2004, बैरिया में 1958, बिल्थरारोड में 1,219 लोगों ने नोटा का बटन दबाया है। इसी प्रकार फेफना में 1,117 और सिकंदरपुर में 1,089 मतदाताओं ने ‘इनमें से कोई नहीं’ को विकल्प के तौर पर चुना है। रसड़ा में 1,339 ने नोटा का प्रयोग किया है।
वहीं बलिया की जनता ने आम आदमी पार्टी को भी पूरी तरह से नकार दिया है। जिले की 7 सीटों में से 4 पर आम आदमी पार्टी ने अपने उम्मीदवार उतारे थे। लेकिन किसी भी सीट पर आप प्रत्याशी नोटा से भी अधिक वोट नहीं पा सके हैं। बलिया नगर में नोटा को 1,054 मत मिले हैं, जबकि आप उम्मीदवार को महज 512 वोट मिले हैं। इसी प्रकार बांसडीह में नोटा को 2004 व आप को 660, बैरिया में नोटा को 1958 व आप को 787 और सिकंदरपुर में नोटा को 1,089 व आम आदमी पार्टी को महज 231 मत मिले हैं। यानी कि चुनाव में आप का बुरा हाल हुआ।
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