बलियाः पूरे यूपी में भाजपा की लहर चली। भाजपा को पूर्ण बहुमत हासिल हुआ। इस चुनाव में सपा को कुछ सीटों की बढ़त मिली तो वहीं बसपा को भारी नुकसान हुआ। बसपा को केवल एक सीट पर जीत हासिल हुई है। पूरे प्रदेश में चल रही भाजपा की आंधी में केवल रसड़ा के विधायक उमाशंकर सिंह ने बसपा की लाज बचाई है।विधायक उमाशंकर सिंह ने लगातार तीसरी बार जीत हासिल की है।
रसड़ा ही ऐसी सीट है, जो बसपा के लिए हमेशा लकी रही है। इस सीट से कई बार घूरा राम जीते। तब ये अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित थी। लेकिन साल 2012 में परिसीमन के बाद यह सीट सामान्य हो गई। तब से लेकर अब तक उमाशंकर सिंह ही इस सीट पर कब्जा जमाए हुए हैं।2012 के चुनाव में सपा के सनातन पांडेय को उन्होंने 52 हजार मतों से हराया। इसके बाद 2017 में जब भाजपा की लहर चली, तब भी उमाशंकर सिंह ने भाजपा के रामइकबाल सिंह को 33 हजार मतों से पछाड़ा।
लेकिन इस बार चुनाव में उन्हें सुभासपा प्रत्याशी महेंद्र चौहान ने कड़ी टक्कर दी। सिंह ने 5194 मतों से जीत हासिल की है।बसपा की बात करें तो 1984 में गठित हुई पार्टी ने कई उतार चढ़ाव देखे लेकिन 2012 से 2022 तक पार्टी का जनाधार धीरे-धीरे घट रहा है। 1993 में बसपा 12 वीं विधानसभा चुनाव में पूरी तरह फॉर्म में उतरी। यूपी की 164 प्रत्याशियों में बसपा के 67 प्रत्याशी जीते। यह जीत बसपा के लिए बड़ी थी। मुलायम सिंह यादव और कांशीराम ने हाथ मिला लिया। मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री बने।
हालांकि दोनों दलों के बीच मनमुटाव शुरू हुआ और महज एक साल 181 दिन तक मुख्यमंत्री रहने के बाद मुलायम की सरकार गिर गई।3 जून 1995 को मायावती यूपी की मुख्यमंत्री बनीं लेकिन केवल 137 दिनों तक ही सीएम रही। 1996 में बीएसपी ने फिर 296 सीटों पर प्रत्याशी उतारे लेकिन 67 सीटों पर ही जीत हासिल की। 2002 में यूपी की 401 विधानसभा सीटों पर बसपा लड़ी, इनमें से 98 विधायक जीते। 2007 में बंपर जीत के साथ बसपा के 403 में से 206 विधायक जीते और मायावती मुख्यमंत्री बनीं।
लेकिन 2012 से बसपा के हालात बिगड़ने लगे। वोट परसेंट सिमटने लगा। 2012 में 403 सीटों में से सिर्फ 80 सीटों पर जीत मिली। 2017 में केवल 19 सीटें हाथ आई। और 2022 में पार्टी लगभग अंत की ओर है। केवल 1 सीट ही हासिल हुई है।
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