बलिया। जिले के करीब 34 हजार परिवारों को जल्द ही राहत मिलने वाली है। क्योंकि जल्द ही शहर में ड्रेनेज नेटवर्क बिछने वाला है। उत्तर प्रदेश जल निगम अमृत-2.0 योजना से सीवरेज सिस्टम विकसित करने का प्लान बना रहा है। सर्वे में करीब 34 हजार घर सामने आए हैं, जिन्हें सीवरेज सिस्टम से जोड़ा जाएगा। जिसके लिए निजी कंपनी को डीपीआर बनाने की जिम्मेदारी भी सौंपी जा रही है। कंपनी चयन प्रक्रिया शुरू की गई है। इसके लिए टेंडर मांगा गया है।
बता दें इस समय में कोई ड्रेनेज और सीवरेज सिस्टम नहीं हैं। लोग अपने घरों का मल-जल सड़क पर बहाते हैं। बारिश के समय मुसीबत काफी बढ़ जाती है। करीब दो सौ मोहल्ले पानी में डूब जाते हैं। सरकारी कार्यालय और स्टेडियम महीनों जलजमाव की समस्या से परेशान रहते हैं। 2010 में सीवरेज सिस्टम विकसित करने की कोशिश शुरू हुई थी। करीब 100 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए थे। धनराशि भी मिल गई लेकिन काम पूरा नहीं किया गया।
20-20 एमएलडी क्षमता का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट भी गायब हो गया। 30 किलोमीटर बनाई गई लाइन का कोई पता नहीं चल रहा है। करोड़ों रुपये का बंदरबांट हो गया है। मामले में कई इंजीनियरों के खिलाफ चार्जशीट जारी किया गया है। अब नए सिरे से सीवरेज सिस्टम विकसित करने की तैयारी शुरू हुई है। अगर व्यवस्था हो जाएगी तो यकीनन तीन लाख से अधिक आबादी को लाभ मिलेगा।
उत्तरप्रदेश जल निगम के नगरीय खंड के अधिशासी अभियंता अंकुर श्रीवास्तव का कहना है कि शासन ने डीपीआर मांगा है। सर्वे कराया जा रहा है। एक कंपनी चयनित करने की कार्रवाई चल रही है जो डिजाइन बनाएगी। अगर काम पूरा हो जाएगा तो शहर की जलजमाव की समस्या निश्चित रुप से दूर हो जाएगी। लोगों को राहत मिलने के साथ ही बीमारियां भी कम पनपेंगी।
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