बलिया डेस्क:आज का दिन बलिया ही नहीं अपितु सम्पूर्ण भारतीय इतिहास में बहुत अहम स्थान रखता है। आज ही के दिन 08 अप्रैल 1857 को भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के पहले क्रांतिकारी मंगल पांडे को फांसी दी गई थी। बलिया के नाम को अंतरराष्ट्रीय पटल पर स्वर्णिम अक्षरों से अंकित कराने वाले क्रांति वीर मंगल पांडेय के पैतृक गांव नगवां में स्थापित स्मारक परिसर की सुधि लेने की फुर्सत शासन-प्रशासन के पास नहीं है।
आजादी की लड़ाई में प्रथम कुर्बानी देने वाले मंगल पांडेय का घर परिवार तथा उनका स्मारक परिसर आज भी उपेक्षित है। आपको बता दें कि साल 2004 में प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव मंगल पांडेय की प्रतिमा का अनावरण करने के लिए उनके पैतृक गांव नगवां आए थे, तब स्मारक परिसर का जीर्णोद्धार नए तरीके से हुआ था। लेकिन आज जहां उसकी चाहुमुखी विकास की जरुरत है परंतु अफसोस यह है कि वर्तमान में रखरखाव के अभाव में स्मारक परिसर अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा हैउनके नाम पर बने राजकीय महिला महाविद्यालय में जगह-जगह झाड़ उग आए हैं। नगवां में जाने वाला रास्ता भी जर्जर अवस्था में है।
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