बलिया डेस्क: मोदी सरकार के नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों को अब बलिया का साथ मिला है। आंदोलन के समर्थन में अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति में शामिल विभिन किसान संगठनों और संगठनों के लोगों ने गुरुवार को जिलाधिकारी कार्यालय पर धरना दिया।
वहीँ उत्तर प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी ने भी किसानो को अपना समर्थन दिया है। रामगोविंद ने कहा कि जिस तरह से आंदोलन को रोकने के लिए मोदी सरकार द्वारा किसानों पर बल का प्रयोग किया गया, वह निंदनीय है, सरकार को इसके लिए किसानों से माफी मांगनी चाहिए।
रामगोविंद ने ये बात गुरुवार को अपने आवास पर पार्टी कार्यकर्ताओं से मुलाकात के दौरान कही। उन्होंने कहा कि किसान सरकार के सामने अपनी बात रखने के लिए दिल्ली आना चाहते थे। लेकिन सरकार ने उनकी बात सुनने के बजाए उनपर हमला करवा दिया। उन्हें रोकने के लिए बल का प्रयोग किया गया। इसकी जितनी भी निंदा की जाए, वह कम है।
सरकार के इस रवैये से देशभर के किसानों में असहज स्थिति बनी हुई है। इसे सहज करने के लिए मोदी सरकार को किसानों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसान सरकार के नए कृषि कानूनों से खुश नहीं है, उसे डर है कि इस कानून के आने से देशी-विदेशी कंपनियां भारतीय नवरत्न कंपनियों की तरह खेती-बारी को भी निगल जाएगीं। किसान इसे काला कानून बता रहे हैं।
सरकार को चाहिए कि किसानों की बात सुने और उनके डर को दूर करे, न कि उनपर हमला करवाए। नेता प्रतिपक्ष ने किसान पर हमले को देश की आत्मा पर हमला बताया। उन्होंने कहा कि किसान अपनी खेती बारी से केवल खुद के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए अन्न पैदा करता है।
उसके ऊपर हमला, मतलब देश के लिए अन्न पैदा करने वालों पर हमला है, देश की आत्मा पर हमला है। इसलिए सरकार को अपने इस कुकृत्य के लिए माफी मांगने में देर नहीं करना चाहिए। इस दौरान रामगोविंद ने सरकार के सामने कई मांगें भी रखीं। उन्होंने कहा कि किसानों पर बल प्रयोग करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो। किसान आंदोलन में अपने प्राणों की आहुति देने वाले किसानों को शहीद का दर्जा प्रदान दिया जाए।
कॉरपोरेट के हित में बनाए गए कृषि संबंधी नए काले कानूनों को तत्काल वापस लिया जाए। एमएसपी को कानूनी रूप दें और घोषणा करें कि भविष्य में कृषि पर बनने वाले किसी भी तरह के कानून किसानों को विश्वास में लेकर ही बनाए जाएंगे।
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