बलिया। पढ़ लिखकर डॉक्टर, इंजीनियर एक बड़ा इंसान बनने का सपना हर बच्चे का होता है। और अपने सपनों को पूरा करने के लिए वह शिक्षित होना चाहता है, यह सोच के साथ बलिया का विक्की भी स्कूल में अपना लिखवाने गया था क्या पता था वह जिंदा घर ही नहीं लौट पाएगा। और तालाब में डूबने से उसकी जिंदगी ही खत्म हो जाएगी। उधर परिजनों ने समय पर इलाज न मिलने का आरोप लगाकर अस्पताल में जमकर तोड़फोड़ की। जहां पुलिस ने मामले को संभाला और परिजनों को समझाइश दी।
शोरगुल सुनकर उक्त प्राथमिक विद्यालय में तैनात शिक्षामित्र सुबेख सिंह तालाब में छलांग लगाकर आदित्य को बचाकर अस्पताल ले गया। आदित्य ने होश में आते ही बताया कि मेरे साथ विक्की भैया भी थे, वह भी डूब रहे थे, वह कहां हैं। ग्रामीण भागकर तालाब के पास पहुंचे। विक्की को ढूंढ निकाला और उसे लेकर सोनबरसा अस्पताल ले गए जहां ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर अविनाश कुमार से इलाज के लिए कहा। परिजनों ने आरोप लगाया कि इलाज में विलंब होने से विक्की की मौत हो गई। मासूम की मौत से आक्रोशित ग्रामीणों ने अस्पताल में जमकर तोड़फोड़ की।
घटना की सूचना पर एसएचओ राजीव कुमार मिश्र पुलिस बल के साथ अस्पताल पहुंचे। यहां आक्रोशित ग्रामीणों को समझा-बुझाकर मामला शांत कराया गया। परिजनों ने ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर के खिलाफ पुलिस को तहरीर दी है। जबकि डॉक्टर अविनाश का कहना है कि अस्पताल के सीसीटीवी कैमरे में देखा जा सकता है। बिना समय गंवाए बच्चे का चेकअप किया गया। अस्पताल आने से पहले ही बालक की मौत हो चुकी थी।
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