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बलिया: अब चुकानी पड़ेगी बूंद-बूंद पानी की कीमत, बोरिंग करवाने पर सख्त नियम लागू

बलिया। जिले में अब बोरिंग के लिए नए नियम लागू हो गए हैं। अब कहीं भी बोरिंग करने के लिए निर्धारित साइट पर पंजीकरण कराकर जिला प्रशासन से एनओसी लेनी होगी। अगर ऐसा नहीं किया तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उद्योगों एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को उनके यहां इस्तेमाल होने वाले पानी का पूरा हिसाब देना होगा। जितना पानी वह खर्च कर रहे हैं, उन्हें उतना भुगतान भी करना होगा।

दरअसल पूरे प्रदेश में गिरते भूजल स्तर की ओर ध्यान देते हुए सरकार ने भूगर्भ जल अधिनियम को तैयार किया है। इसके लिए गिरते भूजलस्तर की खपत को लेकर नए नियम बनाए गए हैं जिनका पालन सभी को करना होगा। इसके तहत भूगर्भ जल का व्यावसायिक इस्तेमाल करने वाले सभी प्रतिष्ठानों या संस्थानों को खपत किए गए भूगर्भ जल के अनुसार वार्षिक भुगतान करना होगा। इसके अलावा सभी प्रतिष्ठानों और संस्थानों को रजिस्ट्रेशन कराकर विभाग ने अनापत्ति प्रमाणपत्र भी लेना होगा। स्कूल, कॉलेज, होटल, व्यावसायिक प्रतिष्ठान भी इस नियम के दायरे में आएंगे।

इस साइट पर करना होगा पंजीकरण- पूर्व से संचालित और नई बोरिंग के लिए लोगों को अब सबसे पहले UPGWD की वेबसाइट पर पंजीकरण करना होगा। इसके बाद यह आवेदन संबंधित विभाग के पास जाएगा, जहां से सत्यापन के बाद जिला प्रशासन की ओर से एनओसी जारी की जाएगी। जांच में एनओसी नहीं मिलने पर संचालक पर जुर्माना व एक साल तक का कैद भी हो सकता है।

जलउपभोक्ताओं को देना होगा इतना शुल्क– भूगर्भ जलस्तर के अनुसार, वाणिज्यिक और औद्योगिक एवं सामूहिक जल उपभोक्ता को दो अलग श्रेणी में बांटते हुए क्षेत्र के हिसाब से शुल्क निर्धारित किया गया है। भूगर्भ जलस्तर श्रेणी, सेमी क्रिटिकल, क्रिटिकल के अलावा अति दोहित यानी शहरी क्षेत्र के लिए अलग-अलग श्रेणी में वार्षिक शुल्क तय किया गया है। भूगर्भ जलस्तर की श्रेणी के हिसाब से प्रतिदिन 500 घन मीटर, 500 से 1000 घनमीटर, 1000 से 5000 घनमीटर और 5000 घनमीटर रोजाना के हिसाब से शुल्क तय है। वहीं नए नियमों का पालन करवाने और कूपों के पंजीकरण-सत्यापन के लिए जिलाधिकारी ने चार सदस्यीय कमेठी भी बनाई है। इसमें लघु सिंचाई विभाग के एई, एक्सईएन जल निगम, एक्सईएन सिंचाई और संबंधित ब्लॉक के बीडीओ होंगे।

बलिया भूगर्भ जल विभाग के प्रभारी अधिकारी श्याम सुंदर यादव का कहना है कि अब सभी कूपों का पंजीकरण और एनओसी लेना अनिवार्य कर दिया गया है। सभी वाणिज्यिक, औद्योगिक और सामूहिक भूगर्भ जल उपभोक्ताओं को रजिस्ट्रेशन के लिए पांच हजार रुपये और अनापत्ति प्रमाणपत्र के लिए भी पांच हजार रुपये शुल्क की रसीद कटानी होगी। इसके बाद खपत के हिसाब से वार्षिक शुल्क अदा करना होगा। घरेलू और कृषि भूगर्भ जल उपभोक्ता को किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं देना है। जिले के उद्यमियों को इस संबंध में नोटिस भेजा जाने लगा है। जिलाधिकारी की ओर से इसकी मॉनिटरिंग को कमेटी बनाई गई है।

Rashi Srivastav

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