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बलियाः सालों से खा रहे थे मुफ्त राशन, अब कार्यवाही के डर से 255 अपात्रों ने सरेंडर किया राशनकार्ड

बलियाः सरकार के द्वारा चलाई जा रही जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ कई अपात्र भी ले रहे हैं। ऐसे में शासन ने ऐसे लाभार्थियों पर शिकंजा कसना शुरु कर दिया है। सरकार की सख्ती का असर ऐसा हुआ कि अब अपात्र लाभार्थी खुद ही सरेंडर कर रहे हैं और योजनाओं से अपने नाम कटवा रहे हैं।

ऐसा ही नजारा देखने को मिला बलिया के जिला पूर्ति कार्यालय पर, जहां राशन कार्ड सरेंडकर करने के लिए लोगों की भीड़ लगी रही। पिछले दो दिनों में 250 से ज्यादा अपात्र राशनकार्ड वापस कर चुके हैं। विभाग के द्वारा यह संख्या बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

दरअसल जनपद में कई ऐसे लोगों है, जो पिछले कई सालों से गरीबों का अनाज डकार रहे हैं। इस समस्या को लेकर विभागीय अधिकारियों ने एक जून के बाद बाजार दर पर वसूली करने का फरमान जारी किया। जिसके बाद जिले के 255 अमीर अपात्रों ने चुपके से अपना राशन कार्ड सरेंडर कर दिया। हैरानी का बात है कि पात्र गृहस्थी व अन्त्योदय कार्ड धारक इन अमीर अपात्रों में गाड़ी, बंगला, महंगे मोबाइल, सरकारी नौकरी पेशा और कारोबारी शामिल हैं।

इन लोगों ने कोरोनाकाल में गरीबों के हक का राशन खाया। जब जांच शुरु हुई तो सैंकड़ों अपात्र सामने आए। सरकार ने समस्त आयकर दाता, ग्रामीण क्षेत्र में चार पहिया वाहन स्वामी, ट्रैक्टर, हार्वेस्टर, एयर कंडीशन वाले,पांच एकड़ से अधिक सिंचित भूमि वालों को अपात्र माना है। इसके अलावा ऐसे परिवार जिनकी सालाना आय दो लाख से अधिक हो तथा जिनके पास एक से अधिक शस्त्र लाइसेंस हो को अपात्र माना है।

बता दें कि जनपद में 4 लाख 73 हजार 917 लोग पात्र गृहस्थी कार्डधारत हैं, 1 लाख 1701 लोगों के पास अंत्योदय कार्ड हैं। कोटेदारों की संख्या 1426 है जबकि प्रतिमाह 585 टन गेंहू का वितरण होता है। लेकिन यह गेंहू गरीबों की थाली तक पहुंचने से पहले अमीरों के घर पहुंच जाता था। ऐसे में अब प्रशासन ने सख्ती की तैयारी कर ली है। अपात्र लाभार्थी 31 मई तक अपने कार्ड सरेंडर कर सकते हैं।

इस सम्बंध में जिलापूर्ति अधिकारी कृष्ण गोपाल पांडेय ने बताया कि शासन के फरमान का असर दिखने लगा है। अपात्र कार्ड धारक अपना कार्ड जमा कर रहे हैं। 31 मई के बाद जांच के बाद अपात्र मिलने वाले लोगों से बाजार दर पर वसूली की जाएगी।

Rashi Srivastav

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