बलिया। पराली जलाने से निकला धुआं जानलेवा प्रदूषण का कारण बन रहा है। पिछले कई सालों से किसानों को पराली न जलाने की सलाह दी जा रही है यहां तक कि पराली जलाने पर जुर्माने का भी प्रावधान है लेकिन फिर भी पराली जलाने के मामले कम होने का नाम नहीं ले रहे। ऐसे में अब प्रशासन ने पराली जलाने वाले किसानों पर सख्त कदम उठाया है।
ऐसे किसान जो बार-बार सचेत करने के बावजूद पराली जला रहे थे, उनकी लिस्टिंग कर कृषि विभाग द्वारा उनकी किसान सम्मान निधि रोकने की भी संस्तुति की गई है। इन किसानों पर अब पीएम किसान सम्मान निधि की राशि नहीं दी जाएगी। पराली न जलाने को लेकर सक्रिय जिलाधिकारी अदिति सिंह का कहना है कि पर्यावरण को बचाना हम सभी का नैतिक कर्तव्य है।
इसी कड़ी में जनपद के कृषि विभाग एवम ग्राम्य विकास विभाग के कर्मचारी लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहे और क्षेत्र में रहकर जहां भी पराली जलाने की घटना दिखी, कर्मचारियों द्वारा तत्परता से आग को बुझाने का कार्य किया गया। इसके तहत बेरुआरबारी और चिलकहर विकासखण्ड के कर्मचारियों द्वारा ‘पराली दो खाद लो’ के अंतर्गत 10 ट्राली पराली भी गो आश्रय स्थल में भेजा गया।
इसके साथ ही कर्मचारियों ने किसानों को समझाया और पराली वाले खेत में हैपी सीड ड्रिल से बुआई कराई। साथ ही किसानों को पराली सड़ाने के लिए मुफ्त में डी कंपोजर भी दिया गया। डीएम का कहना है कि पराली न जलाने हेतु लगातार अभियान चलाया जा रहा है यह अभियान अनवरत जारी भी रहेगा। कोई भी हारवेस्टर मालिक यदि बिना पराली प्रबंधन यंत्र लगे धान की कटाई करेगा तो उसका हारवेस्टर सीज किया जाएगा साथ ही पराली जलाने वाले किसानों की छटनी कर उनको जुर्माना लगाया जाएगा और किसान सम्मान की धनराशि रोकने की भी संस्तुति की जाएगी।
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