बलिया- फिर विवादों में ‘साइरेक्स’ , बायोकेमिस्ट्री एनलाइजर मशीन बंद, मरीज परेशान

बलिया। जिला अस्पताल में बायोकेमिस्ट्री एनलाइजर मशीन खराब होने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यहां तक गरीब मरीजों को उधारी लेकर बाहर से जांच करानी पड़ रही है। गर्भवती महिलओं और बच्चों की जांच के लिए ज्यादा परेशानी हो रही है। बता दें समस्या डेढ़ महीने पुरानी है। मशीन को बनाने में सिर्फ 6 हजार रुपये का खर्च आएगा। मशीन का लैंप खराब है। इससे खून की रीडिंग होती है। समस्या को दूर करने के लिए बजट भी स्वीकृत कर दिया गया है, लेकिन लखनऊ की साइरेक्स कंपनी इसे ठीक कराने में लापरवाही बरत रही है।जिसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।

ताजा मामला पश्चिमी छोर पर माल्देपुर निवासी संगीता साहनी का है। जिनकी तबीयत खराब थी। गुरुवार को दोपहर करीब सवा 12 बजे वह अपने परिजनों के साथ जिला महिला चिकित्सालय पहुंची। हालांकि अन्य दिनों की अपेक्षा आज भीड़ कम थी। उन्होंने महिला चिकित्सक को दिखाया। डॉक्टर ने उन्हें खून की जांच कराने की सलाह दी। पर्ची लेकर वह पैथोलाजी पहुंचीं तो वहां पर कर्मचारियों ने दो तरह की जांच किया, लेकिन अन्य जांचें बाहर से करवाने के लिए कहा। जब बाहर जांच हुई तो उनके नौ सौ रुपये खर्च हो गए। बकौल संगीता, उनके पास पैसे नहीं थे तो कर्ज लेकर अस्पताल पहुंचीं थी। दरअसल यह समस्या सिर्फ संगीता की नहीं है, बल्कि इन जैसे 150 मरीज रोज परेशान हो रहे हैं।

महिला अस्पताल की आटो बायोकेमिस्ट्री एनलाइजर मशीन महीनों से खराब है। इसके चलते खून की जांच बंद है। जनता को निजी लैबों के भरोसे निर्भर होना पड़ रहा है। समस्या खास तौर पर गर्भवती महिलाओं व नवजात बच्चों को ज्यादा हो रही है। समस्या डेढ़ महीने पुरानी है। मशीन को बनाने में सिर्फ छह हजार रुपये का खर्च आएगा। मशीन का लैंप खराब है। इससे खून की रीडिग होती है। समस्या को दूर करने के लिए बजट भी स्वीकृत कर दिया गया है, लेकिन लखनऊ की साइरेक्स कंपनी इसे ठीक कराने में लापरवाही बरत रही है।

लिहाजा, मधुमेह, संक्रमण, किडनी व लीवर समेत दर्जन भर तरीके की जांचें नहीं हो पा रही हैं। मरीजों को एक हजार से 1500 रुपये चुकाने पड़ रहे हैं। बच्चों की जांच पूरी तरह बंद है। महिला अस्पताल में रोजाना चार से पांच सौ मरीजों की ओपीडी है, 40 प्रतिशत लोगों को खून की जांच लिखी जाती है। इस समय प्रेग्नेंसी व ब्लड ग्रुप की मैनुअल जांचें ही हो पा रहीं हैं। जिला महिला अस्पताल की सीएमएस डा. सुमिता सिन्हा ने बताया कि आटो बायोकेमिस्ट्री एनलाइजर मशीन की मरम्मत के लिए साइरेक्स कंपनी को पत्र लिखा गया है। वह मशीन ठीक नहीं कर रहे हैं। उनकी लापरवाही से समस्या विकट हो गई है। कंपनी के इंजीनियर दो दिन पहले आए थे, लेकिन मशीन के खराब उपकरण को बदला नहीं गया। जबकि इसका बजट भी स्वीकृत कर दिया गया है। सिर्फ छह हजार रुपये खर्च आना है। इसी सप्ताह समस्या दूर करने की मोहलत मांगी गई है।

Ritu Shahu

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