मानसून की दस्तक होते ही बलिया में जलभराव की समस्या का खतरा मंडराने लगा है। बारिश में कटहल नाले की सफाई का काम प्रभावित हो गया है, ऐसे में सफाई न होने से जलभराव की समस्या बढ़ जाएगी।
बता दें कि 25 वार्डों का मल जल और सुरहाताल का पानी कटहल नाला के जरिए गंगा में गिरता है। 19.20 किलोमीटर लंबे नाले में जलकुंभी होने से पानी का निकास धीमी गति से हो रहा है। बारिश में जलनिकाली से होने के कारण नाले का पानी ओवरफ्लो होकर बहने लगता है और पूरे शहर में पानी भर जाता है।
यहां तक कि शहर का स्टेडियम, सरकारी आवास, बसंतपुर स्थित जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय भी पूरी बरसात जलजमाव में डूबा रहता है। अब कटहल नाले का सफाई कार्य प्रभावित होने के बाद डर है कि कहीं इस साल भी ऐसा ही माहौल न हो जाए। जानकारी के मुताबिक कटहल नाले के 9.5 किलोमीटर में सफाई के लिए कुल 90 लाख रूपये आंवटित हुए थे। 5 जुलाई तक काम पूरा होना था, लेकिन बारिश के चलते काम पूरा नहीं हो पाया। केवल 4 किलोमीटर में ही नाले की सफाई हो सकी है।
कटहल नाले से जलनिकासी में विजयीपुर रेगुलेटर का अहम योगदान देखने को मिला है। 4.11 करोड़ की लागत से रेगुलेटर की क्षमता वृद्धि की जा रही है। सिंचाई विभाग को सिविल कार्य के लिए 2.11 करोड़ रुपये का बजट मिला है। दो करोड़ से रेगुलेटर का स्टील गेट वरेली कार्यशाला खंड से मंगाया गया है प्रोजेक्ट पर कार्य तेजी से हो रहा है, लेकिन नाले की सफाई ही समय से नहीं होगी तो पानी का निकास तेजी नहीं हो पाएगा।
इधर सिंचाई विभाग अधिशासी अभियंता सीवी पटेल का कहना है कि कटहल नाला की सफाई का कार्य चल रहा है। बारिश के चलते कुछ कार्य प्रभावित है, लेकिन बहुत जल्द लक्ष्य पूरा कर लिया जाएगा। विजयीपुर रेगुलेटर की क्षमता वृद्धि का कार्य भी अंतिम चरण में चल रहा है। इस साल कटहल नाला से जलनिकासी बाधित नहीं होगी।
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