बलिया: फेफना की यह मीटिंग चुनाव में उपेंद्र तिवारी की सिर दर्द बढ़ाएगी?

बलिया में चुनाव पूरी तरह उबाल पर है। माहौल बना हुआ। चारों ओर सियासी गोटी सेट करने का ही काम चल रहा है। इस बीच फेफना विधानसभा क्षेत्र में कुछ ऐसा हो गया है जिसके चलते राजनीतिक गलियारे में खलबली मची हुई है। दरअसल फेफना में भूमिहार जाति के लोगों ने एक बैठक की है। जिसमें फेफना से बीजेपी विधायक और उम्मीदवार उपेंद्र तिवारी के विरोध में बातें हुईं हैं।

सूत्रों का कहना है कि भूमिहार जाति के लोगों की इस बैठक में फेफना सीट पर उपेंद्र तिवारी के विरोध की तैयारी पर चर्चा हुई है। चुनाव में उपेंद्र तिवारी का सीधे तौर पर विरोध करने की बातचीत भी चली है। विरोध का कारण कुछ जातिगत और कुछ उनके कार्यों को लेकर है। फेफना में भूमिहार जाति की उपेक्षा हुई है ऐसा दावा किया जा रहा है। जिसके चलते उपेंद्र तिवारी के विरोध का स्वर उठ रहा है। तो वहीं क्षेत्र में विकास कार्यों का ना होना भी इस विरोध की एक वजह बताई जा रही है।

मीटिंग में क्या तय हुआ:

फेफना के सुरहीं गांव में भूमिहार समाज की यह बैठक बुलाई गई थी। घंटों चली इस बैठक में मंत्री उपेंद्र तिवारी को वोट ना देने और अपना समर्थन सपा के उम्मीदवार संग्राम सिंह यादव को देने की बात कही गई है। मीटिंग में भाषण देते हुए एक व्यक्ति का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। जिसमें साफ तौर पर कहा जा रहा है कि उपेंद्र तिवारी ने भूमिहार समाज का वोट तो ले लिया लेकिन उनके लिए काम कुछ नहीं किया।

इस बैठक में पूर्व विधायक सुधीर राय भी मौजूद रहे। फेफना सीट से सपा के उम्मीदवार संग्राम सिंह यादव भी इस बैठक में शामिल थे। सुधीर राय ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा है कि “समाज के जिन लोगों ने उपेंद्र तिवारी को वोट देकर विधायक बनाया उन्हीं के साथ क्षल हुआ है। इसलिए हमने भूमिहार समुदाय के लोगों की बैठक बुलाई थी। हमने तय किया है कि वो बाहर के हैं और इस बार उन्हें बाहर भेजना है।”

तो क्या खेला हो जाएगा फेफना में:

फेफना में वोटरों की संख्या लगभग 3 लाख 30 हज़ार से अधिक है। इनमें अगर सिर्फ भूमिहार मतदाताओं की बात करें तो इनकी आबादी करीब 20 हज़ार है। 2017 के विधानसभा चुनाव में उपेंद्र तिवारी को जीत मिली थी। उपेंद्र तिवारी की जीत में बड़ा फैक्टर भूमिहार समाज का वोट भी था। सियासी जानकार बताते हैं कि भूमिहार समुदाय का ज्यादातर वोट उपेंद्र तिवारी को ही मिला था।

बलिया में 3 मार्च को मतदान होने वाला है। वोटिंग से लगभग दो हफ्ते पहले हुई इस मीटिंग ने फेफना के सियासी फिजा में आग लगा दिया है। अब देखना है कि उपेंद्र तिवारी की ओर से इस नाराज़गी को दूर करने के लिए क्या रणनीति अपनाई जा रही है। सवाल है कि क्या उपेंद्र तिवारी यह डैमेज कंट्रोल कर पाएंगे? बड़ा सवाल है कि संग्राम सिंह यादव की मौजूदगी में उन्हें समर्थन देने का ऐलान किया गया है। तो क्या भूमिहार वोट पूरी तरह से संग्राम सिंह यादव के पाले में जाएगा? इतना तो तय है कि अगर ये वोट संग्राम सिंह यादव को मिलता है तो जीत की दिशा में ये एक बड़ी छलांग होगी।

Akash Kumar

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