बलिया में राजनीतिक सरगर्मी अब बढ़ने लगी है। यह विधानसभा 2022 के चुनाव के पर्चा दाखिला की आखिरी तिथि के ठीक पहले का दिन है। बैनरों के बिना चौराहे अब और अधिक दिख रहे हैं। जिला मुख्यालय यानी कलेक्ट्रेट के बाहर करीब 2 बजे का समय है। लोकतंत्र के माहपर्व नाम से चर्चित विधानसभा चुनाव में पर्चा दाखिला नामक रस्म अदायगी के लिए अचानक से समर्थकों का एक हूजूम उमड़ रहा है। भीड़ से अचानक आवाज़ उठती है, ‘के… ह….नारद…अरे, के…ह….नारद’। नारद राय के नाम का हल्ला उठता है और सैकड़ों लोग कलेक्ट्रेट के ठीक बाहर इकट्ठा होने लगते हैं।
ठीक यही नारद राय के साथ हुआ। फिलहाल का हाल ये है कि अंबिका चौधरी के पुत्र जिला पंचायत अध्यक्ष हैं और उनकी सीट फेफना से सपा के उम्मीदवार हैं संग्रााम सिंह यादव। अंबिका चौधरी- संग्राम सिंह यादव के बीच के इस त्याग रूपी समझौते की कहनी फिर कभी, फिलहाल जिला कलेक्ट्रेट पर पर्चा दाखिला के गहमागहमी के बीच स्टेयरिंग थामें अंबिका चौधरी और नारद राय की उपस्थिति ने बताया कि सपा का दौर लौटा तो गाड़ी कैसे चलेगी। समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेताओं की मंच पर उपस्थिति थी। आगे पंक्तियों में अंबिका चौधरी, सनातन पांडेय, व्यास जी गोेड समेंत सपा और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के कई नेता बैठे थे। मंच पर स्वागत आदि के बाद नारद राय ने भाषण देने के लिए मंच लिया। यहां एक बाद ध्यान रखने की है।
छात्र संघ की ट्रेनिंग। नारद राय ने अपने कुल 9 मिनट के भाषण में हरेक तीसरी बात पर ताली बजवाई और हरेक बात से लोगों को जोड़ा। अपने वक्तव्य में एन एच 31 की अव्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए कहा, ‘बिहार से तिलकहरू त दूर एनएच पर फेफना में सांड़ लगंड़ा के चल रहे ’। लोगों को अपनी बात में जोड़ते- जोड़ते भाजपा प्रत्याशी दयाशंकर सिंह के बयान के जवाब में यहां तक कह दिया कि ‘बलिया को बंबई नहीं बनने देंगे क्योंकि बंबई सही जगह नहीं है “। खैर इस मतलबी जमाने को तुकबंदी का जमाना भी नहीं कह सकते। लेकिन इस तरह के बलिया से बंबई का तुक मिला कर एक बे सिर पैर की बात पर एक उम्मीदवार के प्रत्युत्तर के बाद जो मंच से नारद राय ने किया वो कुछ नया था। बंबई पर टिप्पणी करते-करते नारद राय अचानक माइक से एक कदम बाएं गए और लगभग चीख कर अपने पैरों में ताव भरा और कहा, ‘ मंत्री जी बंबईया चाल चलते हैं।
मगर चुनाव हारने के बाद भी मंत्री रहने वाले अंबिका चौधरी ने बहुत शालीन लिहाज में हँसु राम को मंच पर बुलाया और समय के हवाला पा उन्होंने कुल एक मीनट तीस सेकेंड में अपनी बात समाप्त कर दी। यहां बस एक बात कि वो समाज जो हक-हिस्सेदारी और बराबरी की लड़ाई लड़ रहा और खुद में राजनीतिक हस्तक्षेप की सबसे बड़ी गुंजाइश देखता है उसे अपने नेताओं से किस तरह के गर्वता बोध की उम्मीद है ये जानना चाहिए। क्या सपा-सुभासपा के गठबंधन में जिसकी जितनी भागेदारी- उतनी उसकी हिस्सेदारी का नारा कम कम प्रयोग में लाना है या कोई अंडर करेंट है जो आत्मविश्वास से भरा हुआ है।
26 जनवरी 2026 को जमुना राम मेमोरियल स्कूल के प्रांगण में 76वां गणतंत्र दिवस समारोह…
बलिया। ध्रुवजी सिंह स्मृति सेवा संस्थान, पूर-बलिया के सचिव भानु प्रकाश सिंह ‘बबलू’ ने विश्वविद्यालय…
बलिया जिले की फेफना विधानसभा क्षेत्र के तीखा गांव में टोंस नदी तट पर स्थित…
बलिया। फेफना जंक्शन पर एक्सप्रेस ट्रेनों के ठहराव को लेकर क्षेत्रवासियों की लंबे समय से…
बलिया के चितबड़ागांव स्थित जमुना राम मेमोरियल स्कूल में भारत रत्न, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी…