बलिया। जनननायक चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय का चौथा दीक्षांत समारोह राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में हुआ। समारोह में कुल 25 हजार 220 छात्र-छात्राओं को उपाधि दी गई, जिसमें 22 हजार 421 स्नातक स्तर और 2 हजार 799 स्नातकोत्तर स्तर के छात्र सम्मिलित हैं। 34 मेधावियों को गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया, जिसमें 28 छात्राएं और 6 छात्र हैं। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि इसरो के मानद प्रोफेसर पद्मश्री वाईएस राजन और विशिष्ट अतिथि प्रदेश सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय सम्मिलित हुए।
राज्यपाल ने की यूनिवर्सिटी की तारीफ– राज्यपाल ने कहा कि दीक्षांत समारोह शैक्षणिक यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव है। यह खुशी की बात है कि विश्वविद्यालय बलिया जनपद की सांस्कृतिक विरासतों को खोजने और संरक्षित रखने की दिशा में काम कर रहा है। गोल्ड मेडलिस्ट में छात्राओं की संख्या 80 फीसदी होने पर हर्ष जताया। यह दौर विज्ञान और तकनीकी का है, इसके साथ कदमताल को तैयार रहना होगा। आत्मनिर्भर भारत का संकल्प इसी दिशा में बढ़ाया गया सार्थक कदम है। स्टार्टअप इण्डिया, स्टैण्डअप इण्डिया, पीएम स्कॉलरशिप जैसे कार्यक्रम उद्यमशील युवाओं के लिए नई सम्भावना हैं। विश्वविद्यालय ने बलिया जनपद की मिट्टी से जुड़े ख्याति प्राप्त व्यक्तियों को ‘लिविंग लिजेंड्स ऑफ बलिया‘ फोरम से जोड़ने की अभिनव कोशिश की।
परिषदीय विद्यालय के बच्चों को दुलारा-राज्यपाल आनंदीबेन पटेल दीक्षांत समारोह में परिषदीय विद्यालय के बच्चों से भी मिली। बच्चों को खुब दुलारा, उन्हें बैग और अन्य पढ़ाई-लिखाई से सम्बन्धित उपहार भेंट किए। बच्चों ने भी अपनी ओर से नये साल के अवसर पर ग्रिटिंग कार्ड, पेंटिंग आदि दिए, जिसे पाकर राज्यपाल काफी प्रफुल्लित हुईं। उन्होंने कहा कि छोटी उम्र में ही बच्चे जो देखते हैं, वह सीखते हैं। यहां से बच्चे घर जाएंगे तो एक सकारात्मक विचार लेकर जाएंगे। यहां का चित्रण अपने घर और आस-पड़ोस में करेंगे, जिससे अन्य बच्चों ने प्रेरणा का भार पैदा होगा।
इसरो के मानद प्रोफेसर ने दिए सफलता के मंत्र- दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि इसरो के मानद प्रोफेसर वाईएस राजन ने विभिन्न विषय वर्ग के विद्यार्थियों को उनके क्षेत्र से सम्बन्धित सफलता की सम्भावनाओं के कई मंत्र दिए। कहा कि सफल होने के लिए सबसे जरूरी है- जीवन, शरीर और मन को स्वस्थ और स्वच्छ रखना। उन्होंने तीन शब्द ‘एब्यूज, डिस्यूज और मिस्यूज‘ यानि दुर्व्यवहार, अनुपयोग और दुरूपयोग से बचने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि काफी लोग सरकारी नौकरी ही चाहते हैं, पर सरकारी नौकरियां सीमित है। अब भी भारत में अधिकतर रोजगार असंगठित क्षेत्रों से है, जैसे-स्वव्यवसाय, दुकानदार, कार्मिक आदि। उन्होंने अतिरिक्त तकनीकी कौशल अर्जित करने पर भी जोर दिया।
लक्ष्य प्राप्ति में सरकार की योजनाएं सहायक– विशिष्ट अतिथि योगेंद्र उपाध्याय ने बलिया की महान विभूतियों को नमन कर सम्बोधन दिया। कहा कि कोई दीक्षांत समारोह किसी भी यूनिवर्सिटी के लिए विशिष्ट होता है। यह क्षण विद्यार्थियों और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने वाले शिक्षकों को प्रफुल्लित करने वाला होता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन की दृष्टि से विवि महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। यह पहला विश्वविद्यालय है, जहां राष्ट्रीय शिक्षा नीति के कार्यान्वयन के लिए आंतरिक मूल्यांकन और आंकलन सम्बन्धी प्रशिक्षण को सम्पन्न कराया गया।
कुलपति ने जताया आभार– विषम परिस्थितियों में बलिया आने के लिए कुलपति ने राज्यपाल का आभार जताया और फिर विश्वविद्यालय की अब तक उपलब्धियों को विस्तार से बताया। उन्होंने मिसाईल मैन डॉ. कलाम साहब के साथ ‘बियोंड 2020’ नामक पुस्तक की रचना करने वाले इसरो के मानद प्रोफेसर पद्मश्री वाईएस राजन के प्रति भी आभार जताते हुए कहा कि प्रो. राजन का सम्बोधन विद्यार्थियों के लिए काफी प्रेरणादायी होगा। समारोह में राज्यसभा सांसद नीरज शेखर, जिलाधिकारी सौम्या अग्रवाल, एसपी राजकरन नैय्यर, एसडीएम सदर प्रशांत नायक सहित विवि के स्टाफ व विभिन्न कालेज के प्रबंधक मौजूद थे।