बलिया में बेसिक शिक्षा का स्तर सुधारने की कोशिशें नाकाम होती नजर आ रही हैं। जहां स्कूलों को गोद लेने वाले अधिकारियों का गैर जिम्मेदाराना रवैया सामने आया है। सरकार के निर्देश पर जिले के 500 परिषदीय स्कूलों को 250 अधिकारियों ने दो-दो स्कूलों को गोद लिया। लेकिन करीब 125 अधिकारियों ने ही गोद लिए स्कूलों का रिपोर्ट कार्ड विभाग को दिया। बाकी 125 अधिकारी गोद लिए स्कूलों में झांकने तक नहीं पहुंचे।
डीएम से लेकर ईओ तक शामिल- एक रिपोर्ट के मुताबिक परिषदीय स्कूलों को गोद लने वाले अधिकारियों की सूची में डीएम, सीडीओ, डीपीआरओ, बीएसए, डीआईओएस के अलावा अधीक्षण अभियंता पीडब्ल्यूडी, प्रांतीय खंड पीडब्लूडी, खनन अधिकारी, चकबंदी अधिकारी, प्रभारी कृषि विज्ञान केंद्र सोहांव, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला पंचायत, परियोजना प्रबंधक भूमि सुधार निगम बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी के अलावा सभी तहसीलदार, सभी ईओ आदि शामिल है।
बता दें अधिकारियों को स्कूल गोद देने का उद्देश्य स्कूल में बच्चों की शैक्षिक गुणवत्ता और प्रबंधन का पता लगाने का था। अधिकारियों को विद्यालय में नामांकन की स्थिति, शिक्षक, विद्यार्थी की मासिक उपस्थिति, मिड डे मील की गुणवत्ता, बाल वाटिका निर्माण, शैक्षिक पल स्तर, इन्फ्रास्ट्रक्चर, संसाधन और मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता, विद्यार्थियों के खातों के लिंक, उनमें यूनिफार्म, बैग और स्वेटर का पैसा पहुंचा या नहीं जैसे बिंदुओं पर अपनी रिपोर्ट तैयार करनी थी।
जिले के चयनित 500 स्कूलों में 19 पैरामीटर के तहत कार्य कराए जाने हैं। जिन स्कूलों में नौ पैरामीटर तक कायाकल्प हुआ है, उसको 19 तक पूरा करना है। लेकिन कई अधिकारियों का गैर जिम्मेदाराना रवैया उजागर हुआ है। जिन्होंने सुधार तो दूर की बात स्कूलों की स्तिथि भी देखना जरूरी नहीं समझा।
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