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बलिया की बदहाल गौशालाएं, हर माह खर्च हो रहे 20 लाख फिर भी सड़कों पर घूम रहे पशु

गायों को लेकर सरकार हमेशा सजग रहती है। बेसहारा पशुओं का सरंक्षण हो, उनके रहने, खाने-पीने का इंतजाम बेहतर तरीके से किया जाए इसको लेकर सरकार ने कई गौशालाएं भी बनवाई हैं। लेकिन दिक्कत की बात यह है कि इन गौशालाओं में अव्यवस्थाओं का अंबार लगा हुआ है। न तो इनमें पशुओं को रखा जाता है, और जिन्हें रखा जाता है वह असमय काल के गाल में समा रहे हैं।

बलिया में तो हाल और भी बुरा है। यहां गौशालाएं भ्रष्टाचार का अड्डा बनी हुई हैं। जिले के अधिकांश अस्थाई गौ-आश्रय केंद्रों का हाल देखकर आप हैरान हो जाएंगे। यहां चारे के नाम पर सिर्फ पुआल का सहारा है। कई केंद्रों पर अंधेरा पसरा है। बिजली की सुविधा तक नहीं है। आश्रय केंद्र संचालकों के प्रति पशु के लिए 30 रुपए दिए जाते हैं लेकिन अव्यवस्थाओं का आलम ऐसा है कि मवेशी असमय दम तोड़ रहे हैं।

जिले में 2 वृहद समेत 28 गोशालाएं है। जिसमें तकरीबन 2200 पशु रखे गए हैं। इन रख-रखाव के लिए हर महीने करीब 20 लाख रुपए का खर्च भी किया जा रहा है। लेकिन यह पशु गौशालाओं में न रहकर किसानों के खेतों में, सड़कों पर झुंड बनाए बैठे दिख जाते हैं। जिसके कारण किसानों की फसलों का नुकसान तो हो ही रहा है, साथ ही आवारा पशु हादसे का भी शिकार बन रहे हैं।

मनियर ब्लॉक क्षेत्र के गौरा बगहीं में कान्हा पशु आश्रय स्थल 4 साल पहले बनाया गया था। यहां वर्तमान में 61 मवेशी हैं। नगरा ब्लॉक के रघुनाथपुर गांव स्थित गौ-आश्रय केंद्र में 80 बेसहारा पशु हैं। लेकिन दोनों गौशालाओं में अव्यवस्थाओं का अंबार है। नगरा ब्लॉक में तो पशुओं की देखरेख के लिए 2 माह से बजट तक नहीं मिला है। गड़वार ब्लॉक के शाहपुर ग्रामसभा के झंगही स्थित अस्थाई पशु आश्रय केंद्र में 50 गोवंश हैं। यहां आज तक बाउंड्रीवॉल और बिजली तक नहीं है। बजट के अभाव में 12 गौवंश को पशुपालकों के सुपुर्द कर दिया गया है। इसके अलावा भी कई गौशालाएं है, जहां अनिमितताओं का अंबार लगा हुआ है।

Rashi Srivastav

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