बैरिया- सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद फौज में सिपाही रहे शंभू नाथ ठाकुर का शुक्रवार को 103 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनकी अंत्येष्टि बहुआरा तट पर की गई।
बताया जाता है कि शंभू नाथ 1939 से 1944 तक नेताजी सुभाष चंद्र बोस के आजाद हिंद फौज में सिपाही रहे। उन्होंने नेताजी के संग वर्मा, इंफाल व कोहिमा में अंग्रेजों के खिलाफ लोहा लिया।
शंभू नाथ ठाकुर को नेताजी से बेहद लगाव था, जिसके कारण वह उनके संपर्क में गए और आजाद हिंद फौज में हिस्सा लिया। ठाकुर के पौत्र विनोद ठाकुर बताते हैं कि द्वितीय विश्वयुद्ध के दिनों की बातें परिवार के साथ साझा नहीं करते थे लेकिन उन्होंने यह जरूर बताया था कि नेताजी जैसा भारत बनाना चाहते थे, वह भारत नहीं बन पाया।
1945 में शंभू नाथ ठाकुर अपने पारिवारिक कारणों से आजाद हिंद फौज छोड़कर वापस अपने गांव आ गए। बाद में नेताजी के निधन के बाद प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की सरकार ने एक व्यवस्था दी कि जो भी आजाद हिंद के सिपाही हैं वे चाहे तो उनका समायोजन भारतीय फौज में किया जा सकता है और इसी क्रम में देश आजाद होने के बाद शंभू नाथ ठाकुर बिहार रेजीमेंट में भर्ती हो गए।
जहां कुछ दिनों के सेवा के बाद वह सेवानिवृत्त हुए। शंभू नाथ ठाकुर अति साधारण परिवार से थे। वह प्रति वर्ष 23 जनवरी को नेताजी का फोटो रखकर उस पर फूलमाला चढ़ाते थे और उन्हें सैल्यूट करते थे।
तहसीलदार गुलाब चंद्रा ने बताया कि स्वतंत्रता सेनानियों की जो सूची है उसमें शंभू नाथ ठाकुर का नाम नहीं शामिल है। इसलिए उन्हें सरकारी सहायता तत्काल नहीं दी गई। मैंने इस संबंध में उनके परिजनों से जानकारी प्राप्त की है। वरिष्ठ अधिकारियों से वार्ता कर अगर सहायता की श्रेणी में आते होंगे तो उनकी अंत्येष्टि आदि के लिए दी जाने वाली सहायता का भुगतान उनके परिजनों को कर दिया जाएगा।
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