अलीगढ: अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) का अल्पसंख्यक दर्जा देश के अंदर भले ही एक मुद्दा बना हुआ हो, लेकिन भारत लेकिन पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी हमेशा से इसके प्रबल समर्थक रहे थे।
टाइम्स ऑफ़ इंडिया की खबर के मुताबिक, यूनिवर्सिटी के पूर्व पीआरओ और उर्दू अकादमी के डायरेक्टर डॉ. राहत अबरार ने बताया कि ‘अटल जी ने एएमयू के अल्पसंख्यक दर्जे को समर्थन दिया था। यहां तक कि उन्होंने अपने चुनावी घोषणापत्र में वादा किया था कि सत्ता में आने पर यूनिवर्सिटी के अल्पसंख्यक दर्जे को बरकरार रखेंगे।
1979 में मध्य अवधि के चुनावों के दौरान, घोषणापत्र में लिखा था, ‘यूनिवर्सिटी को स्वायत्तता और इस्लामिक स्टडी के लिए संस्थान का मूल दर्जा देने के लिए जनता पार्टी उपयुक्त कानून को अमल करने की प्राथमिकता देगी।
हालांकि यह बिल इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा घोषित किया गया था। जबकि इसे जन संघ के नेताओं अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी ने तैयार किया था जो मोरारजी देसाई सरकार की कैबिनेट का हिस्सा थे। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (संशोधन) ऐक्ट को दो साल बाद 1981 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा पास किया गया था।
अबरार ने बताया, ‘तब जनता पार्टी के उपाध्यक्ष राम जेठमलानी ने एएमयू को अल्पसंख्यक यूनिवर्सिटी का दर्जा देने के लिए प्राइवेट मेंबर बिल पेश किया था।’ हालांकि तीन दशक बाद अप्रैल 2016 में बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि एएमयू कोई अल्पसंख्यक संस्थान नहीं है, और पूर्व यूपीए सरकार की अपील को वापस ले लिया था, और कहा था कि एएमयू को अल्पसंख्यक का दर्जा नहीं दिया जा सकता है।
बता दें कि यह विवाद इस साल फिर से तब उठा जब यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि एएमयू और जामिया मिलिया दिल्ली को एससी-एसटी आरक्षण लागू किया जाएगा। योगी आदित्यनाथ ने अपनी एक रैली में इस विषय को जोर-शोर से उठाया था। एएमयु में कोटा सिस्टम पर सवाल उठाते हुए योगी ने अपनी विरोधी राजनीतिक पार्टियों पर दलितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया था।
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