बलिया। कौन कहता है कि आसमां पे सुराख नहीं होता कोई तबीयत से पत्थर तो उछालो यारो। जी हां अगर कुछ करने का जज़्बा हो तो कोई चीज़ मुश्किल नहीं है। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है बलिया के आर्यन ने। 16 वर्षीय आर्यन ने खरीद जैसे छोटे कस्बे से निकलकर डेनमार्क के शहर बिलुंड में भारत का परचम लहराया। बिलुंड में आयोजित पहली अंतरराष्ट्रीय बाल महासभा में आर्यन ने भारत का प्रतिनिधित्व किया और देश का मान बढ़ाया।आर्यन ने बलिया का नाम पूरे देश में रोशन किया। जनपद के हर एक शख्स आर्यन की इस उपलब्धि पर गौरवान्वित महसूस कर रहा है।
आर्यन ने एक अखबार को बताया कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों के अंदर स्वयं का दृष्टिकोण विकसित करना और वैश्विक समाधान सुझाने की क्षमता का विकास करना था। इस आधार पर एक घोषणापत्र भी तैयार किया गया, जिसे संयुक्त राष्ट्र महासभा के पूर्व अध्यक्ष मोगेंस लाइकेटोफ्ट के माध्यम से विश्व के सभी नेताओं को प्रस्तुत किया गया। महासभा के माध्यम से दक्षताओं का विकास करने में जहां सहयोग मिला, वहीं नवीन चुनौतियों से भी रूबरू हुए।
बिलुंड में आयोजित बाल महासभा में बलिया की इस प्रतिभा ने पूरे भारत देश का प्रतिनिधित्व किया और साबित कर दिया कि भारतीय किसी से कम नहीं। आर्यन के परिवारिक परिपेक्ष्य की बात करें तो वह सेवानिवृत्त कृषि वैज्ञानिक डॉ. लालबचन चौधरी के पोते हैं। आर्यन के पिता गाजियाबाद में एफएमडी सेक्टर से जुड़े हैं। आर्यन रॉयन इंटरनेशनल स्कूल नोएडा में 11वीं का छात्र है। आर्यन इतनी छोटी सी उम्र में अद्भुत प्रतिभा के धनी हैं। आर्यन की इस उपलब्धि पर बलिया में हर्ष का माहौल है।
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