बलिया
बलिया की सड़कें खस्ताहाल, कीचड़-जलभराव से बढ़ी मुसीबतें
बारिश से बलिया का हाल बेहाल है। एक तरफ सड़कों पर जलजमाव हो रहा है तो वहीं दूसरी तरफ कई जगह सड़कें ही नहीं है। कई सड़कें पूरी तरह टूट चुकी हैं। जिन पद गाड़ी चलाना तो दूर पैदल चलना तक दूभर हो गया है।
इतनी समस्याओं के बावजूद भी बलिया का नगर पालिका प्रशासन लापरवाह बना हुआ है। नपा के द्वारा 6 सड़कों के निर्माण के लिए मई माह में टेंडर निकाले गए थे, शहर की खस्ताहाल सड़कों की मरम्मत की तैयारी थी। तत्कालीन ईओ दिनेश विश्वकर्मा के द्वारा टेंडर निकाले गए थे लेकिन ईओ के जाते ही चेयरमैन अजय कुमार समाज सेवी ने सभी टेंडर निरस्त कर दिए।
जिससे निर्माण शुरु ही नहीं हो पाया। अब जरा से ही बारिश में सड़के तालाब में तब्दील हो गई है। कई जगह दलदल है, जिससे राहगीर परेशान हो रहे हैं। बाइकों व चार पहिया वाहनों की निकासी में हिचकोले खाना पड़ रहे हैं। वहीं बाइकों के अनियंत्रित होकर गिरने का खतरा भी बना हुआ है। इसके बाद भी जिम्मेदार मौन बने हुए हैं।
बता दें कि शहर के जापलिनगंज में बालेश्वर मंदिरसे दुर्गा मंदिर मार्ग, स्टेशन-टाउनहाल रोड, जगदीशपुर तिराहा से जिला महिला व पुरुष अस्पताल तक, गड़वार रोड से महुआ मोड़ तक और महुआ मोड से मिड्ढी मोड़ तक सड़क निर्माण होना है। इसके अलावा कुंवर सिंह चौराहा से एनसीसी तिराहा तक, स्टेशन चौक रोड, चौक से सिनेमा रोड, शहीदपार्क चौक से आर्य समाज रोड तक की सड़क भी अधूरी पड़ी है।
वहीं बलिया नगर पालिका परिषद के चेयरमैन अजय कुमार का कहना है कि पीडब्लूडी से शहर की सड़कों के निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। जल्द निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा।
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फेफना में अकीदत के साथ मनाया गया मोहर्रम, मातमी जुलूस और हैरतअंगेज करतब बने आकर्षण का केंद्र
बलिया। फेफना थाना क्षेत्र में शुक्रवार को मोहर्रम का पर्व पूरी अकीदत, शांति और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। चिलचिलाती धूप के बावजूद फेफना सहित आसपास के गांवों में पारंपरिक ताजिया जुलूस निकाला गया। हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मातमी दस्तों ने नोहा-ख्वानी और मातम कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
फेफना में निकले मातमी जुलूस के दौरान मुस्लिम समुदाय के युवाओं ने पारंपरिक हैरतअंगेज करतबों का प्रदर्शन किया, जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। वहीं समाजसेवी लडू अंसारी द्वारा जुलूस में शामिल लोगों और राहगीरों के लिए ठंडे शरबत की व्यवस्था की गई, जिसकी लोगों ने सराहना की।
जुलूस निर्धारित मार्गों से गुजरते हुए कर्बला पहुंचा, जहां परंपरागत रीति-रिवाज के अनुसार ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

फेफना के अलावा तीखा, मिठवार, पक्काकोट, बहादुरपुर, सिंहपुर, एकौनी, बलेजी, सागरपाली, अमडारी, निधरिया और मिढ्ढा गांवों में भी मोहर्रम का पर्व शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर थानाध्यक्ष अखिलेश चंद पांडेय पुलिस बल के साथ लगातार क्षेत्र में भ्रमण करते रहे और पूरे आयोजन पर नजर बनाए रखी। पर्व सकुशल संपन्न होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने बलेजी में लगे मेले का भी आनंद लिया।

ग्रामीणों ने कहा कि मोहर्रम केवल शोक का पर्व नहीं, बल्कि इंसानियत, त्याग, सत्य और कुर्बानी का संदेश देने वाला अवसर है, जो समाज में भाईचारा, एकता और आपसी सौहार्द को मजबूत करता है।
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