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बलिया DM ने जिला अस्पताल का किया औचक निरीक्षण, कई कर्मी मिले अनुपस्थित, मांगा स्पष्टीकरण

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बलिया जिलाधिकारी सौम्या अग्रवाल ने मंगलवार को जिला अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने तमाम व्यवस्थाएं परखी और अव्यवस्था मिलने पर नाराजगी जताई। जिलाधिकारी के निरीक्षण से अस्पताल में हड़कंप मच गया। पूरा स्टाफ इधर-उधर व्यवस्थाएं जमाता नजर आय।

बता दें कि जिलाधिकारी ने अस्पताल पहुंचकर वहां मिली कमियों पर नाराजगी व्यक्त करते हुए सीएमओ व सीएमएस को सुधार लाने की चेतावनी दी। उन्होंने उपस्थिति पंजिका की जांच की तो करीब आधा दर्जन कर्मचारी अनुपस्थित मिले। सभी से स्पष्टीकरण लेने का निर्देश दिया।

इसके अलावा डीएम अग्रवाल ने सभी वार्ड में जाकर मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं का सत्यापन किया। मरीजों से बातचीत की और उनका हालचाल जाना। वहीं पोस्ट कोविड वार्ड में मरीजों को भर्ती करने के निर्देश दिए। इसके अलावा परिसर में खराब पड़े आरओ को तुरंत ठीक कराने के निर्देश दिए साथ सीएमओ को निर्देशित करते हुए कहा कि अस्पताल में साफ-सफाई व्यवस्था पर ध्यान देने के निर्देश दिए।

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फेफना में अकीदत के साथ मनाया गया मोहर्रम, मातमी जुलूस और हैरतअंगेज करतब बने आकर्षण का केंद्र

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बलिया। फेफना थाना क्षेत्र में शुक्रवार को मोहर्रम का पर्व पूरी अकीदत, शांति और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। चिलचिलाती धूप के बावजूद फेफना सहित आसपास के गांवों में पारंपरिक ताजिया जुलूस निकाला गया। हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मातमी दस्तों ने नोहा-ख्वानी और मातम कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

फेफना में निकले मातमी जुलूस के दौरान मुस्लिम समुदाय के युवाओं ने पारंपरिक हैरतअंगेज करतबों का प्रदर्शन किया, जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। वहीं समाजसेवी लडू अंसारी द्वारा जुलूस में शामिल लोगों और राहगीरों के लिए ठंडे शरबत की व्यवस्था की गई, जिसकी लोगों ने सराहना की।

जुलूस निर्धारित मार्गों से गुजरते हुए कर्बला पहुंचा, जहां परंपरागत रीति-रिवाज के अनुसार ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

फेफना के अलावा तीखा, मिठवार, पक्काकोट, बहादुरपुर, सिंहपुर, एकौनी, बलेजी, सागरपाली, अमडारी, निधरिया और मिढ्ढा गांवों में भी मोहर्रम का पर्व शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।

सुरक्षा व्यवस्था को लेकर थानाध्यक्ष अखिलेश चंद पांडेय पुलिस बल के साथ लगातार क्षेत्र में भ्रमण करते रहे और पूरे आयोजन पर नजर बनाए रखी। पर्व सकुशल संपन्न होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने बलेजी में लगे मेले का भी आनंद लिया।

ग्रामीणों ने कहा कि मोहर्रम केवल शोक का पर्व नहीं, बल्कि इंसानियत, त्याग, सत्य और कुर्बानी का संदेश देने वाला अवसर है, जो समाज में भाईचारा, एकता और आपसी सौहार्द को मजबूत करता है।

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