बलिया
बलियाः भैंस ने गाय के बछड़े को दिया जन्म, हैरत में पड़े लोग
बलिया जिले में हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है। यहां एक किसान की भैंस ने गाय के बछड़े की जन्म दिया है, जो कि चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीण जहां इसे चमत्कार मान रहे हैं तो पशु चिकित्सतकों का कहना है कि गलत स्पर्म की वजह से ऐसा हो गया है।
वहीं भैंस के जन्मे बच्चे को देखने ग्रामीणों की भीड़ उमड़ रही हैं। ग्रामीण इसलिए भी हैरत में है क्योंकि काले रंग की भैंस ने हूबहू भूरे और सफेद रंग के बछड़े को जन्म दिया है। मामला बेरुआरबारी क्षेत्र का है, जहां एक किसान के घर में भैंस ने बच्चे को जन्म दिया। बच्चे का पड़वे की तरह कोई व्यवहार नहीं था, जब बुजुर्गों ने जांच कि तो बच्चे की पहचान गाय के बछड़े के रुप में है। हालांकि, बछड़ा पूरी तरह भैंस के बच्चे की तरह ह्रष्ट-पुष्ट है लेकिन आगे का हिस्सा गाय के बछड़े की भांति है।
वहीं पशुपालक असेगा निवासी राजनाथ चौधरी ने बताया कि मैंने एक प्राइवेट डॉक्टर से भैंस में सीमेन डलवाया था। यह कैसे हो गया मैं क्या बताऊं यह सब ईश्वर की लीला है। कभी कभार इस तरह के चमत्कार देखने सुनने को मिलता ही रहता है। लेकिन, जो भी हुआ है यह अनोखा है और क्षेत्र में इस प्रकार की कभी कोई घटना सामने नहीं आई है।
दूसरी ओर प्रभारी पशुचिकित्साधिकारी डॉ. संजय कुमार ने बताया कि गलत सीमेन पड़ने की वजह से ऐसा हुआ होगा। कभी कभार इस तरह के मामले देखने को मिलते हैं। स्पर्म जो डाला गया था सम्भव है उससे भैंस निषेचित हो गई इसी के चलते ऐसा हो सकता है।
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फेफना में अकीदत के साथ मनाया गया मोहर्रम, मातमी जुलूस और हैरतअंगेज करतब बने आकर्षण का केंद्र
बलिया। फेफना थाना क्षेत्र में शुक्रवार को मोहर्रम का पर्व पूरी अकीदत, शांति और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। चिलचिलाती धूप के बावजूद फेफना सहित आसपास के गांवों में पारंपरिक ताजिया जुलूस निकाला गया। हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मातमी दस्तों ने नोहा-ख्वानी और मातम कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
फेफना में निकले मातमी जुलूस के दौरान मुस्लिम समुदाय के युवाओं ने पारंपरिक हैरतअंगेज करतबों का प्रदर्शन किया, जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। वहीं समाजसेवी लडू अंसारी द्वारा जुलूस में शामिल लोगों और राहगीरों के लिए ठंडे शरबत की व्यवस्था की गई, जिसकी लोगों ने सराहना की।
जुलूस निर्धारित मार्गों से गुजरते हुए कर्बला पहुंचा, जहां परंपरागत रीति-रिवाज के अनुसार ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

फेफना के अलावा तीखा, मिठवार, पक्काकोट, बहादुरपुर, सिंहपुर, एकौनी, बलेजी, सागरपाली, अमडारी, निधरिया और मिढ्ढा गांवों में भी मोहर्रम का पर्व शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर थानाध्यक्ष अखिलेश चंद पांडेय पुलिस बल के साथ लगातार क्षेत्र में भ्रमण करते रहे और पूरे आयोजन पर नजर बनाए रखी। पर्व सकुशल संपन्न होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने बलेजी में लगे मेले का भी आनंद लिया।

ग्रामीणों ने कहा कि मोहर्रम केवल शोक का पर्व नहीं, बल्कि इंसानियत, त्याग, सत्य और कुर्बानी का संदेश देने वाला अवसर है, जो समाज में भाईचारा, एकता और आपसी सौहार्द को मजबूत करता है।
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