बलिया
बलियाः सफाईकर्मियों की मनमानी से गांवों में पसरी गंदगी
बलिया के ग्रामीण इलाके स्वच्छता अभियान को मुंह चिढ़ाते नजर आ रहे हैं। जिले के गांवों में जगह जगह गंदगी के ढेर लगे हैं वजह है सफाईकर्मियों की मनमानी। यूं तो जिले की कुल 940 ग्राम पंचायतों की साफ-सफाई के लिए 2320 सफाईकर्मी तैनात हैं लेकिन गांव की गलियां गंदगी से पटी पड़ी हैं।
गांव में जगह जगह पसरी गंदगी बीमारियों को न्यौता दे रही है। ग्रामीण परेशान हैं लेकिन सफाईकर्मी अच्छी वेतन लेने के बावजूद भी काम पर नहीं आते। गांव की सफाई के लिए जिम्मेदार 2320 कर्मचारियों की वेतन पर हर माह करीब 7.12 करोड़ रुपए खर्च होते हैं लेकिन अपनी नियुक्ति के बाद से ही सफाईकर्मी मनमाने ढंग से काम करते हैं।
कई गांवों में सफाईकर्मी पहुंचते ही नहीं और जहां पहुंचते हैं वहां बिना कोई काम किए वापस लौट जाते हैं। हनुमानगंज ब्लॉक के सागरपाली में महीनों से सफाई नहीं होने के कारण जगह-जगह कूड़े का ढेर लग गया है और नालियां बजबजा रही हैं। ग्राम प्रधान शैल देवी की मानें तो इस बाबत कई बार अधिकारियों से शिकायत भी की गई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। प्रधान ने बताया कि गांव में तैनात दो सफाईकर्मियों को दो माह से पैरोल जारी नहीं किया गया है इसके बावजूद अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं।
सफाईकर्मियों के न आने से गांव कचरे के ढेर में तब्दील होते जा रहे हैं। वहीं जिले के अधिकांश कार्यालयों में शासन के आदेश के विपरीत सफाईकर्मियों को लगाया गया है। नियुक्ति के बाद से ही जिला पंचायत राज कार्यालय में आधा दर्जन सफाईकर्मी तैनात हैं। इसके अलावा डीडीओ, सीडीओ, जिला दिव्यांग जन कल्याण, समाज कल्याण आदि कार्यालयों में सालों से 80 से अधिक सफाईकर्मी सम्बद्ध हैं। कई सफाईकर्मी तो अफसरों के बंगले पर भी ड्यूटी बजाते हैं। जबकि इतनी संख्या में सफाईकर्मियों की कार्यालय में जरुरत नहीं होती।
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फेफना में अकीदत के साथ मनाया गया मोहर्रम, मातमी जुलूस और हैरतअंगेज करतब बने आकर्षण का केंद्र
बलिया। फेफना थाना क्षेत्र में शुक्रवार को मोहर्रम का पर्व पूरी अकीदत, शांति और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। चिलचिलाती धूप के बावजूद फेफना सहित आसपास के गांवों में पारंपरिक ताजिया जुलूस निकाला गया। हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मातमी दस्तों ने नोहा-ख्वानी और मातम कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
फेफना में निकले मातमी जुलूस के दौरान मुस्लिम समुदाय के युवाओं ने पारंपरिक हैरतअंगेज करतबों का प्रदर्शन किया, जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। वहीं समाजसेवी लडू अंसारी द्वारा जुलूस में शामिल लोगों और राहगीरों के लिए ठंडे शरबत की व्यवस्था की गई, जिसकी लोगों ने सराहना की।
जुलूस निर्धारित मार्गों से गुजरते हुए कर्बला पहुंचा, जहां परंपरागत रीति-रिवाज के अनुसार ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

फेफना के अलावा तीखा, मिठवार, पक्काकोट, बहादुरपुर, सिंहपुर, एकौनी, बलेजी, सागरपाली, अमडारी, निधरिया और मिढ्ढा गांवों में भी मोहर्रम का पर्व शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर थानाध्यक्ष अखिलेश चंद पांडेय पुलिस बल के साथ लगातार क्षेत्र में भ्रमण करते रहे और पूरे आयोजन पर नजर बनाए रखी। पर्व सकुशल संपन्न होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने बलेजी में लगे मेले का भी आनंद लिया।

ग्रामीणों ने कहा कि मोहर्रम केवल शोक का पर्व नहीं, बल्कि इंसानियत, त्याग, सत्य और कुर्बानी का संदेश देने वाला अवसर है, जो समाज में भाईचारा, एकता और आपसी सौहार्द को मजबूत करता है।
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