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बलिया- शराबी बारातियों ने शादी में डाला विघ्न, कांस्टेबल दूल्हा भागा, जाने पूरा मामला
बलिया। सीताकुंड गांव में बिना सात फेरे के ही बारात वापस लौट गई। जहां धूमधाम से बारात तो पहुंची…द्वारपूजा भी उत्साह और उमंग के साथ हुई, लेकिन फिर शराबियों ने रंग में भंग डाल दिया। जिसकी वजह से बारात बैरंग ही लौट गई। जनवासा से लेकर थाने तक घंटों हंगामा होता रहा लेकिन कोई हल नहीं निकला। नतीजन मडप तो सजा लेकिन उसमें साफ फेरे नहीं लिए गए।
पूरा मामला बांसडीहरोड थाना क्षेत्र का है। जहां के निवासी कांस्टेबल की बारात सजधज कर सीताकुंड गांव आई। बारात दरवाजे पर आकर लगी। द्वार पूजा के बाद नाश्ता हुआ। जयमाल के लिए वर-वधू स्टेज पर पहुंचे तो बारात में शामिल युवक स्टेज पर चढ़ गए। सब शराब के नशे में धुत थे कोई वधू पर गिर जा रहा था तो कोई वर पर।
शराबियों की हरकतों पर जब लड़की ने आपत्ति जताई तो दूल्हा और बाराती स्टेज से उतर गए। दूल्हा अपने पिता और बरातियों को बिना बताए बगैर साथियों से साथ मंडप से कहीं और चला गया। वह डायल हंड्रेड में तैनात है। उसने 112 नंबर पर फोन कर बरातियों के साथ मारपीट की सूचना दे दी। जिसके बाद बड़ी संख्या में पुलिस सीताकुंड गांव पहुंच गई। हल्दी थानाध्यक्ष सुरेश चंद्र द्विवेदी के घटनास्थल पर पहुंचने पर सच्चाई पता चली तो उन्होंने उच्चाधिकारियों को सूचना दी। बरातियों में भगदड़ मच गई।
घटना के बाद शनिवार की सुबह से ही थाने में दोनों पक्षों में पंचायत होती रही। शाम तक कोशिश की गई कि लड़का थाने पर आकर बात करे और विवाह संपन्न हो सके। लड़के के पिता देखते रह गए लड़का नहीं आया। इसके लिए लड़के और लड़की पक्ष से 10-15 ग्रामीण सुलह समझौता कि कोशिश में लगे रहे। शनिवार देर शाम तक कोई नतीजा नहीं निकला।
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फेफना में अकीदत के साथ मनाया गया मोहर्रम, मातमी जुलूस और हैरतअंगेज करतब बने आकर्षण का केंद्र
बलिया। फेफना थाना क्षेत्र में शुक्रवार को मोहर्रम का पर्व पूरी अकीदत, शांति और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। चिलचिलाती धूप के बावजूद फेफना सहित आसपास के गांवों में पारंपरिक ताजिया जुलूस निकाला गया। हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मातमी दस्तों ने नोहा-ख्वानी और मातम कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
फेफना में निकले मातमी जुलूस के दौरान मुस्लिम समुदाय के युवाओं ने पारंपरिक हैरतअंगेज करतबों का प्रदर्शन किया, जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। वहीं समाजसेवी लडू अंसारी द्वारा जुलूस में शामिल लोगों और राहगीरों के लिए ठंडे शरबत की व्यवस्था की गई, जिसकी लोगों ने सराहना की।
जुलूस निर्धारित मार्गों से गुजरते हुए कर्बला पहुंचा, जहां परंपरागत रीति-रिवाज के अनुसार ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

फेफना के अलावा तीखा, मिठवार, पक्काकोट, बहादुरपुर, सिंहपुर, एकौनी, बलेजी, सागरपाली, अमडारी, निधरिया और मिढ्ढा गांवों में भी मोहर्रम का पर्व शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर थानाध्यक्ष अखिलेश चंद पांडेय पुलिस बल के साथ लगातार क्षेत्र में भ्रमण करते रहे और पूरे आयोजन पर नजर बनाए रखी। पर्व सकुशल संपन्न होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने बलेजी में लगे मेले का भी आनंद लिया।

ग्रामीणों ने कहा कि मोहर्रम केवल शोक का पर्व नहीं, बल्कि इंसानियत, त्याग, सत्य और कुर्बानी का संदेश देने वाला अवसर है, जो समाज में भाईचारा, एकता और आपसी सौहार्द को मजबूत करता है।
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