बलिया
बलियाः कछुआ चाल से हो रहा पंचायत भवनों का निर्माण, 326 में 63 का काम अधूरा
सरकार जनता की भलाई और क्षेत्र के विकास के लिए अनगिनत योजनाएं लाती है। लेकिन जिम्मेदारों की अनदेखी और भ्रष्टाचार की वजह से यह योजनाएं धरातल पर दम तोड़ती नजर आती है। बलिया में तो हाल और भी बुरा है। साल 2021-22 में सरकार ने जिले के सभी ग्राम पंचायतों में पंचायत भवन बनावाने के निर्देश दिए थे। लेकिन यह निर्देश हवा में ही उड़ गए।
30 नंवबर 2021 तक पंचायत भवनों का काम पूरा होना था लेकिन सचिवों और प्रधानों की अदासीनता के चलते सिर्फ 256 पंचायत भवन ही बनकर तैयार हो सके। बता दें कि सरकार ने पंचायत भवनों को बनवाने का काम चरणों में बांटा था। ताकि आसानी से इनका निर्माण हो जाए और ग्राम पंचायत के सभी अधिकारी-कर्मचारी इनका उपयोग करें ताकि किसी को अपने कामों के लिए भागदौड़ न करनी पड़े।
जिले में कुल 940 पंचायतों में भवन निर्माण होना था। सरकार द्वारा दिए निर्देश के अनुसार पहले चरण में 326 पंचायत भवनों के निर्माण का लक्ष्य पूरा होना था। लेकिन इनमें से 63 भवन का निर्माण किन्हीं कारणों से नहीं हो सका है। 191पर काम चल रहा है। लेकिन विभाग का दावा है कि 256 का काम पूरा हो गया है। जबकि सूत्रों की मानें तो एसबीएमजी के जिला सलाहकार शैलेश ओझा व जनपद स्तरीय सत्यापन के दौरान पंचायत भवनों के निर्माण में खामियां मिली हैं।
भ्रष्टाचार की हद तो यह है कि कई कार्य जो अभी तक पूरे भी नहीं हुए हैं, उन्हें पूर्ण दिखाकर जीओ टैग तक किया गया है। उल्लेखनीय है कि ग्राम स्वराज योजना के तहत पंचायतों में ग्राम सचिवालय संचालन की योजना है ताकि ग्रामीणों को ब्लॉक व तहसील के चक्कर से निजात मिल सके। आननफानन में पंचायत सचिवालय के सहायकों की नियुक्ति भी हो गयी है लेकिन पंचायत भवन का निर्माण कार्य कुछए की चाल से हो रहा है।
डीपीआरओ एके श्रीवास्तव का कहना है कि जिन पंचायतों में जमीन नहीं थी, वहां सम्बंधित एसडीएम से जमीन उपलब्ध कराने के लिए बात हुई है। कुछ पंचायतों में जमीन मिल गयी है। निर्माण कार्य पूर्ण हुए पंचायत भवनों का सत्यापन हो रहा है। कुछ पंचायतों में ग्राम सचिवालय संचालित भी हो रहे हैं। भारी बरसात के चलते कार्य पूरा करने में देर हुई है। हालात से शासन को अवगत करा दिया गया है।
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फेफना में अकीदत के साथ मनाया गया मोहर्रम, मातमी जुलूस और हैरतअंगेज करतब बने आकर्षण का केंद्र
बलिया। फेफना थाना क्षेत्र में शुक्रवार को मोहर्रम का पर्व पूरी अकीदत, शांति और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। चिलचिलाती धूप के बावजूद फेफना सहित आसपास के गांवों में पारंपरिक ताजिया जुलूस निकाला गया। हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मातमी दस्तों ने नोहा-ख्वानी और मातम कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
फेफना में निकले मातमी जुलूस के दौरान मुस्लिम समुदाय के युवाओं ने पारंपरिक हैरतअंगेज करतबों का प्रदर्शन किया, जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। वहीं समाजसेवी लडू अंसारी द्वारा जुलूस में शामिल लोगों और राहगीरों के लिए ठंडे शरबत की व्यवस्था की गई, जिसकी लोगों ने सराहना की।
जुलूस निर्धारित मार्गों से गुजरते हुए कर्बला पहुंचा, जहां परंपरागत रीति-रिवाज के अनुसार ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

फेफना के अलावा तीखा, मिठवार, पक्काकोट, बहादुरपुर, सिंहपुर, एकौनी, बलेजी, सागरपाली, अमडारी, निधरिया और मिढ्ढा गांवों में भी मोहर्रम का पर्व शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर थानाध्यक्ष अखिलेश चंद पांडेय पुलिस बल के साथ लगातार क्षेत्र में भ्रमण करते रहे और पूरे आयोजन पर नजर बनाए रखी। पर्व सकुशल संपन्न होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने बलेजी में लगे मेले का भी आनंद लिया।

ग्रामीणों ने कहा कि मोहर्रम केवल शोक का पर्व नहीं, बल्कि इंसानियत, त्याग, सत्य और कुर्बानी का संदेश देने वाला अवसर है, जो समाज में भाईचारा, एकता और आपसी सौहार्द को मजबूत करता है।
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एक साल से धूल फांक रही करोड़ों की जांच सुविधा, बांसडीह सीएचसी में नहीं चालू हो सकी बायोकेमिस्ट्री एनालाइजर मशीन
बांसडीह (बलिया)। ग्रामीण क्षेत्र के मरीजों को आधुनिक जांच सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) बांसडीह में स्थापित की गई बायोकेमिस्ट्री एनालाइजर मशीन पिछले एक वर्ष से अधिक समय से निष्क्रिय पड़ी है। स्वास्थ्य विभाग की यह महत्वपूर्ण मशीन अस्पताल परिसर तक पहुंचने के बावजूद अब तक चालू नहीं हो सकी है, जिससे क्षेत्र के हजारों मरीजों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है।
जानकारी के अनुसार, मशीन के संचालन से लीवर फंक्शन टेस्ट, किडनी प्रोफाइल, लिपिड प्रोफाइल, यूरिक एसिड, कोलेस्ट्रॉल, थायराइड, इलेक्ट्रोलाइट्स, कार्डियक प्रोफाइल, कैल्शियम, मैग्नीशियम, प्रोटीन और आयरन समेत करीब 30 प्रकार की महत्वपूर्ण जांचें सीएचसी स्तर पर ही उपलब्ध हो सकती हैं। फिलहाल इन जांचों के लिए मरीजों को जिला अस्पताल या निजी पैथोलॉजी केंद्रों का सहारा लेना पड़ता है, जिससे समय और धन दोनों की अतिरिक्त लागत उठानी पड़ती है।
सीएचसी बांसडीह में प्रतिदिन सैकड़ों मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। सामान्य जांच सुविधाएं उपलब्ध होने के बावजूद गंभीर बीमारियों से जुड़ी कई आवश्यक जांचों का अभाव बना हुआ है। ऐसे में मशीन का चालू होना क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। अनुमान है कि इससे क्षेत्र की लगभग 40 हजार आबादी को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।
बायोकेमिस्ट्री एनालाइजर एक अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरण है, जिसे क्लिनिकल केमिस्ट्री एनालाइजर भी कहा जाता है। यह रक्त, प्लाज्मा और सीरम जैसे जैविक नमूनों की रासायनिक जांच कर विभिन्न रोगों के सटीक निदान में मदद करता है। आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है।
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए बलिया के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. अभय नारायण राय ने कहा कि उन्हें मशीन के स्थापित न होने की जानकारी नहीं थी। उन्होंने आश्वासन दिया कि मामले की जांच कराकर मशीन को शीघ्र चालू कराने की कार्रवाई की जाएगी।
सीएमओ ने कहा कि मशीन के संचालन से बांसडीह सीएचसी में कई महत्वपूर्ण जांचें शुरू हो जाएंगी, जिससे मरीजों को स्थानीय स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध होंगी और उन्हें अनावश्यक भागदौड़ से राहत मिलेगी। अब क्षेत्रवासियों को मशीन के जल्द शुरू होने का इंतजार है।
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