बलिया में रिंग बंधा मरम्मत के नाम पर 22 करोड़ का बंदरबांट!

बलिया। जनपद में फ्लड फाइटिंग के नाम पर बीते पांच दशकों में खरबों रूपए खर्च कर दिए गए। बावजूद जिला प्रशासन बाढ़ तथा कटान से गांववासियों को बचाने के लिए अभी तक कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकाल पाए हैं। जिला प्रशासन की इसी नाकाम कोशिशों में एक है दूबे छपरा रिंग बंधा। जिसकी मरम्मत के नाम पर जिला प्रशासन ने बीते पांच वर्षों में 22 करोड़ रूपए खर्च कर चुके हैं। बावजूद दूबे छपरा रिंग बंधा को बचा नहीं पाए। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दूबे छपरा रिंग बंधा का निर्माण सर्वप्रथम 55 वर्ष पूर्व गीता प्रेस गोरखपुर द्वारा किया गया था।

लेकिन 2016 में आई भयंकर बाढ़ के चलते ये बंधा 27 अगस्त को टूट गया। इसके बाद बंधे की मरम्मत का कार्य शुरू हुआ और तटबंध के निर्माण का कार्य मेसर्स आरपी सिंह एंड कंपनी को सौंपा गया। कंपनी ने वर्ष 2017 में मरम्मत कार्य शुरू किया और प्वाइंट 0 से 1.900 मिट्टी/ स्लोप पिचिंग तथा 0.650 से 1.400 तक लांचिंग एप्रोन का कार्य करने के साथ-साथ एक स्पर भी बनाया। इस कार्य की कुल लागत 15 करोड़ 51 लाख29 हजार 951 रूपए आया। लेकिन अफसोस रिंग बंधा टिक नहीं पाया और एक बार फिर 2018 में आई बाढ़ की भेंट चढ़ गया।

बाढ़ खत्म होने के बाद जिला प्रशासन ने एक बार फिर मरम्मत करने का निर्णय लिया और इस बार 0.650  से 0.720 तथा 1.200 से 1.300 तक कुल छह करोड़ 66 लाख 57 हजार 880 रूपए की लागत से मरम्मत कार्य किया गया। लेकिन इस बार भी वही हुआ जो पहले हुआ था 2019 में सब कुछ खत्म हो गया। अब सवाल यह उठता है कि 22 करोड़ खर्च करने के बाद भी बंधा क्यों नहीं टिक पाया? क्या सिर्फ कागजों में लागत दिखाकर जनता की गाढ़ी कमाई का बंदरबांट किया गया है!

बंधे के घेरे में हैं ये गांव–  दूबे छपरा रिंग बांध के घेरे में उदई छपरा, गोपालपुर, दूबे छपरा, प्रसाद छपरा, गुदरी सिंह के टोला, बुद्धन चक, मिश्र गिरी के मठिया, टेंंगरहीं, चितामण राय के टोला, मिश्र के हाता सहित दर्जन भर गांवों की हजारों की आबादी बांध के टूटने से जलमग्न हो गई थी। इसके अलावा पीएन इंटर कालेज, डिग्री कालेज, स्वास्थ्य केंद्र, आयुर्वेदिक अस्पताल सब पानी से घिर गया था।

तिलक कुमार 

बलिया ख़बर

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