यूपी के लखीमपुर खीरी जिले में एक दलित किशोरी ने फंदा लगाकर जान दे दी. उसके घर में खाने की नौबत थी. पड़ोस से खाना मांगकर लाया गया था. तीन बच्चों में खाना कम पड़ गया तो परेशान किशोरी ने यह आत्मघाती कदम उठा लिया. एसडीएम ने मामले की जांच शुरू करा दी है. निघासन कस्बे की बाहरी बस्ती में कटान पीड़ित रहते हैं. इन्हीं में एक परिवार छोटेलाल का भी है. छोटेलाल की मौत के बाद उसकी पत्नी जगराना और तीन बच्चे झोपड़ी डालकर रह रहे हैं.
बताया जाता है कि जगराना के घर कई दिनों से फांके की नौबत चल रही थी. जगराना का कहना है कि पिछले दो दिनों से घर में अनाज का एक दाना नहीं था. वह उधार राशन लेने के लिए गई थी. इसी बीच उसकी बेटी ज्योति (15 वर्ष) पड़ोस से थोड़ा खाना मांगकर लाई. वह अपना खाना अपने भाई को देना चाहती थी, लेकिन उसकी बहन ने भी हक जताया तो रोटियां कम पड़ गईं. इन हालातों और भूख से परेशान ज्योति ने फंदा लगा लिया.
उसे जिला अस्पताल लाया गया, यहां उसकी मौत हो गई. ज्योति की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हैंगिंग की पुष्टि हुई है. उधर एसडीएम अखिलेश यादव का कहना है कि परिवार गरीब जरूर है, लेकिन उनका राशन कार्ड बना है. जनवरी का राशन लिया गया था. उन्होंने नायब तहसीलदार से रिपोर्ट तलब की है.
जगराना बताती हैं कि पहले बाढ़ ने घर छीन लिया और अब भूख, बेबसी के हालात ने बेटी. उनका घर पहले शारदा नदी ने बेघर कर दिया था. इसके बाद यह परिवार आकर निघासन कस्बे के नई बस्ती मोहल्ले में घास फूस का घर बनाकर रहने लगा था. करीब चार साल पहले छोटेलाल की मौत हो गई. जगराना के चार बच्चे थे. उसने अभी कुछ सालों पहले अपनी बड़ी बेटी की शादी की थी.
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